वर्ष 1987 में इस जासूस को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। उसने जासूसी की बात स्वीकार कर ली थी। 2015 में पोलार्ड को सशर्त आज़ादी मिली। उस पर अमरीका से बाहर जाने पर रोक थी मगर अपने अंतिम दिन गुज़ार रही ट्रम्प सरकार ने इस्राईल को यह तोहफ़ा दिया कि पोलार्ड पर पांच साल से जारी यात्रा प्रतिबंध में विस्तार नहीं किया।
नेतनयाहू ने तेल अबीब पहुंचने पर पोलार्ड और उसकी पत्नी का स्वागत किया और इसकी वीडिया इस्राईली पीएम आफ़िस ने जारी की। यहूदी पोलार्ड और उसकी पत्नी ने तेल अबीब एयरपोर्ट पहुंचने पर ज़मीन को चूमा।
नेतनयाहू ने इस अवसर पर पोलार्ड को इस्राईली नागरिकता कार्ड दिया और कहा कि अब से तुम इस्राईल के नागरिक हो।
पोलार्ड ने 1980 के दशक में न्यूयार्क में इस्राईली जनरल से संपर्क किया था और दसियों हज़ार डालर की रक़म वसूल करके इस्राईल को ख़ुफ़िया जानकारियां देना शुरू कर दिया था। पोलार्ड ने हज़ारों दस्तावेज़ इस्राईली जनरल को पहुंचाए और इस तरह अमरीका के साथ भारी ग़द्दारी की।
पोलार्ड का मुद्दा अमरीका इस्राईल संबंधों के मार्ग में एक बड़ी रुकावट बना रहा क्योंकि पेंटागोन और सीआईए के अधिकारियों को इस बात पर भारी ग़ुस्सा था कि पोलार्ड ने पैसे के बदले बहुत अहम राज़ इस्राईल को दे दिए थे। पोलार्ड की जासूसी के नतीजे में इस्राईल को जो जानकारियां मिली थीं उनके आधार पर उसने ट्यूनीशिया में फ़िलिस्तीनी संगठन पीएलओ के ठिकाने पर हमला किया था जिसमें 60 लोग मारे गए थे। इसी तरह इस्राईल ने इन जानकारियों की मदद से कई टारगेट किलिंग भी की थी।