24 दिसंबर 2020 - 12:58
परमाणु समझौते की सशर्त बहाली से यूरोप के पीछे हटने की वजह?

समाचारपत्र गार्डियन ने लिखा है कि यूरोपीय देशों के विदेश मंत्री परमाणु समझौते को सशर्त रूप से बहाल न करने पर सहमत हो गए हैं।

गार्डियन ने परमाणु समझौते के सदस्य यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की सोमवार की बैठक की तरफ़ इशारा करते हुए लिखा है कि ब्रिटेन, फ़्रान्स और जर्मनी के विदेश मंत्रियों का मानना है कि तेहरान और वाॅशिंग्टन को परमाणु समझौते में परिवर्तन या इसमें अन्य देशों को शामिल करने की शर्त के बिना ही इस समझौते के संपूर्ण पालन की ओर लौट आना चाहिए। यूरोप की यह नीति, उस नीति से स्पष्ट रूप से पीछे हटने के समान है जिसका उल्लेख कुछ समय पहले जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास ने यूरोपीय ट्रायका का प्रतिनिधित्व करते हुए किया था। मास ने दावा किया था कि मौजूदा हालात, सन 2015 के हालात से पूरी तरह अलग हैं और परमाणु समझौते में परिवर्तन करते हुए इसमें ईरान के मीज़ाइल कार्यक्रम और उसकी क्षेत्रीय भूमिका के विषयों को भी शामिल किया जाना चाहिए। यह ऐसी स्थिति में है कि परमाणु समझौते से अमरीका के निकल जाने और उसकी ओर से ईरान के ख़िलाफ़ एकपक्षीय प्रतिबंधों की बहाली के बाद यूरोपीय ट्राॅयका ने परमाणु समझौते के संबंध में अपनी 11 प्रतिबद्धताओं में से किसी एक का भी पालन नहीं किया और तेहरान को मजबूर हो कर अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं को चरणबद्ध तरीक़े से कम करना पड़ा था।

 

दूसरी ओर इस बात के मद्देनज़र कि अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन जीत चुके हैं और उन्होंने चुनाव से पहले वादा किया था कि वे अमरीका को परमाणु समझौते में लौटा देंगे, यूरोपीय ट्राॅयका ट्रम्प की अनुपस्थिति में इस बात की कोशिश करेगा कि जेसीपीओए प्लस की बात करके तेहरान पर दबाव बढ़ाए और बैड पुलिसमैन की भूमिका निभाए। ऐसा लगता है कि यूरोपीय ट्राॅयका का यह रोल, तेहरान को अमरीका से हर्जाना लेने की शर्त से पीछे हटने पर मजबूर करने के लिए है लेकिन यह भूमिका, ईरानी संसद के हालिया बिल से पूरी तरह विफल हो चुकी है।

 

ईरान ने परमाणु समझौते के अनुच्छेद नंबर 36 के आधार पर जो क़दम उठाए हैं उनके अलावा संसद ने भी प्रतिबंधों की समाप्ति और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बिल पारित किया है जिसके आधार पर सरकार इस बात के लिए बाध्य है कि अगर गुट चार धन एक ने अपनी प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह से पालन न किया तो वह इस बिल के पारित होने के दो महीने बाद एनपीटी के पूरक प्रोटोकोल का स्वेच्छा से पालन बंद कर दे और यूरेनियम के संवर्धन का स्तर 20 प्रतिशत तक पहुंचा दे। दूसरी ओर ऐसा प्रतीत होता है कि परमाणु समझौते में परिवर्तन को स्वीकार करने के लिए ईरान पर ट्रम्प की ओर से डालने जाने वाले अधिकतम दबाव की विफलता ने यूरोप वालों को यह संदेश दे दिया है कि उन्हें उस रास्ते पर नहीं चलना चाहिए जिस पर ट्रम्प चले हैं क्योंकि इसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा।

 

बहरहाल इस बात की संभावना मौजूद है कि वाइट हाउस में होने वाले परिवर्तन के बाद परमाणु समझौता एक बार सामान्य स्थिति पर लौट आए लेकिन निश्चित रूप से यह ईरान का हक़ है कि वह इस समझौते में एक ऐसा बिंदु बढ़वाए जिसका कोई भी सदस्य देश उल्लंघन न कर सके और दूसरे यह कि दूसरे पक्ष, ईरान के ख़िलाफ़ अमरीकी सरकार की अधिकतम दबाव की नीति के कारण तेहरान को होने वाली क्षति की भरपाई करें।