18 दिसंबर 2020 - 17:21
ईरान से मुक़ाबले के बहाने, चार वर्षों तक ट्रम्प जिस शाख़ पर बैठे थे उसे ही काटते रहे

पिछले चार वर्षों के दौरान, अमरीका के आर्थिक प्रतिबंधों ने वेनेज़ुएला और ईरान को पहले से कहीं अधिक वाशिंगटन के पारंपरिक विरोधियों के नज़दीक कर दिया है।

चीन और रूस अमरीका के ख़िलाफ़, इस मौक़े से भरपूर फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। इन देशों ने आड़े वक़्त में अमरीकी प्रतिबंधों का शिकार देशों के साथ सहयोग करके अमरीका विरोधी एक मज़बूत मोर्चा तैयार कर दिया है।

इसके अलावा, कोरोना वायरस महामारी से मुक़ाबले में सहयोग करके चीन और रूस ने वेनेज़ुएला और ईरान का भरोसा जीता है। इस तरह से अमरीका के मुक़ाबले में चीन और रूस भरपूर भू-राजनीतिक लाभ उठा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम की रिपोर्ट के मुताबिक़, वेनेज़ुएला की एक तिहाई आबादी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमरीका की मानवीय सहायता की पेशकश को हर बार अस्वीकार किया है, क्योंकि तेस से समृद्ध इस देश की इस स्थिति के लिए कोई और नहीं, अमरीका ही ज़िम्मेदार है। वहीं चीन ने अपने विदेशी प्रभाव का विस्तार करने के लिए इस अवसर का आगे बढ़कर फ़ायदा उठाया।

दिसंबर और अप्रैल 2019 के बीच, चीन ने वेनेज़ुएला के खाद्य पदार्थों के कुल आयात के 40 प्रतिशत भाग की आपूर्ति की और महामारी से लड़ने के लिए बड़े पैमाने पर चिकित्सा सहायदा प्रदान की। अब चीन और वेनेज़ुएला की दोस्ती, मानवीय सहायता और व्यापार से कहीं अधिक है।

आर्थिक सहयोग और सैन्य अनुबंधों के अलावा, रूस ने भी राजनीतिक रूप से वेनेज़ुएला का जमकर समर्थन किया है। 7 दिसम्बर को वेनेज़ुएला की संसद में बहुमत हासलि करने के बाद, मादुरो राष्ट्रीय टेलीविज़न पर रूसी अधिकारियों के साथ ज़ाहिर हुए और राष्ट्रपति पुतिन का शुक्रिया अदा किया। वेनेज़ुएला और रूस के अधिकारियों ने ग़ैर क़ानूनी अमरीकी प्रतिबंधों से मिलकर मुक़ाबला करने पर बल दिया।

इसी तरह से तेहरान के ख़िलाफ़ कड़े अमरीकी प्रतिबंधों ने ईरान, चीन और रूस को पहले से कहीं अधिक एक दूसर के क़रीब कर दिया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण, तेहरान और बीजिंग के बीच संभावित 25 वर्षीय व्यापक साझेदारी का समझौता है, जिसके तहत चीन, ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में 280 अरब डॉलर और परिवहन और विनिर्माण बुनियादी ढांचे में 120 अरब डॉलर का निवेश करेगा।

दूसरी ओर, अमरीका के लाख विरोध के बावजूद अक्तूबर में ईरान से संयुक्त राष्ट्र के हथियारों के प्रतिबंध हटने के बाद, तेहरान और मास्को के बीच संयुक्त सैन्य समझौता होने के समाचार हैं। इसके अलावा, तेहरान अपनी ज़रूरत के हथियार और सैन्य उपकरणों की चीन और रूस से आपूर्ति करेगा। इस सहयोग और समझौतों के परिणाम कुछ भी निकलें, लेकिन यह तय है कि इससे क्षेत्र में अमरीकी हितों को भारी नुक़सान पहुंचेगा।

हाल के वर्षों में, चीन और रूस ने ईरान के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने का भी प्रयास किया है। इन प्रयासों के तहत, दिसंबर 2019 में हिंद महासागर और ओमान खाड़ी में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शामिल है। कड़े अमरीकी प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि अमरीकी प्रतिबंध, तेहरान को बीजिंग और मास्को के साथ संबंधों को मज़बूत बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

पिछले चार वर्षों के दौरान, ट्रम्प प्रशासन जैसा कि दावा करता रहा कि अधिकतम दबाव ईरान को अपना व्यवहार बदलने पर मजबूर कर देगी, क्षेत्र में ऐसा कुछ भी देखने में नहीं आया, बल्कि अब अमरीका को ही अपना व्यवहार बदलने पर मजबूर होना पड़ेगा। ट्रम्प प्रशासन की इस ग़लती को सुधारने के लिए अमरीकी विशेषज्ञ और सलाहकार, बाइडन प्रशासन को तुरंत रूप से तेहरान और काराकास के साथ संबंधों को लेकर वैकल्पिक रास्तों पर विचार करने की सलाह दे रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस दौरान हालात बहुत बदल चुके हैं, इसलिए इस ग़लती को अब कभी नहीं सुधारा जा सकेगा।