17 दिसंबर 2020 - 12:29
ट्रम्प एक ही समय में बच्चे भी और ज़ख़्मी सांप भी! व्हाइट हाउस में बने रहने के लिए ट्रम्प की कुछ ऐसी योजना जो ख़ून कि नदियां भी बहा सकती है

इस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की यह स्थिति है कि पूरा अमेरिका ट्रम्प को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा है कि वह चुनाव हार चुके हैं लेकिन वह एक छोटे से बच्चे की तरह इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है। अमेरिका के 2020 के राष्ट्रपति चुनाव पर हर तरह के प्रश्न चिन्ह लगाकर ट्रम्प ने यह भी कोशिश की कि चुनाव के आयोजन की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़ा कर दें, लेकिन उनके इन तमाम प्रयासों के बावजूद अब लगभग सभी अमेरिकी इस बात को मानने लगे हैं कि ट्रम्प चुनाव हार चुके हैं।

सभी राजनीतिक बहसों और आकलनों के अलावा अब अमेरिका सहित पूरी दुनिया में यह चर्चा आरंभ हो गई है कि डोनल्ड ट्रम्प, जिनकी आयु 75 वर्ष की है वह राष्ट्रपति पद पर बने रहने के लिए ऐसा बर्ताव कर रहे हैं जैसे एक छोटा सा बच्चा अपने खिलौने को बचाने के लिए करता है। अब तो ट्रम्प के क़रीबी भी इस बात को मानने लगे हैं कि वह चुनाव हार चुके हैं। ट्रम्प द्वारा चुनाव परिणाम को लेकर उठाए गए सवालों और धांधली के आरोपों के बीच स्वयं अमेरिका की सर्वोच्च अदालत के तीन न्यायधीश, कि जिन्हें ट्रम्प ने ही नियुक्त किया था, संयुक्त तौर पर इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि चुनाव में किसी भी तरह की कोई धांधली नहीं हुई है। तीनों जजों ने ट्रम्प के समर्थकों की ओर से कुछ राज्यों के चुनाव को रद्द किए जाने की मांग को भी खारिज कर दिया है। अब जो बात सुनिश्चित है वह यह है कि जो बाइडेन अमेरिका के अगले राष्ट्रपति होंगे और इसको देखते हुए डोनल्ड ट्रम्प को व्हाइट हाउस से अपना बोरिया-बिस्तर समेटना शुरू कर देना चाहिए और जितनी जल्दी हो वह वहां से निकल जाएं।

लेकिन इन सबके बीच ट्रम्प व्हाइट हाउस छोड़ने के मूड में नज़र नहीं आ रहे हैं। ट्रम्प के क़रीबियों के अनुसार, जो बाइडेन के शपदग्रहण के बाद भी ट्रम्प व्हाइट हाउस में ही रहना चाह रहे हैं। वहीं कुछ जानकारों की मानें तो उनका कहना है कि इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि ट्रम्प की बात सही हो और अमेरिकी चुनाव में धांधली हुई हो। लेकिन यह धांधली इतनी व्यापक रही होगी कि वह वोटों के प्रतिशत को बदल सकती थी और अगर ऐसा हुआ है तो वह इस स्थिति में संभव है कि जब अमेरिकी सत्ता का प्रशासानिक ढांचा स्वयं ट्रम्प के व्हाइट हाउस में बने रहने का विरोधी रहा हो। वहीं ट्रम्प द्वारा लगातार अमेरिकी चुनाव पर सवाल खड़ा किए जाने से देश और विदेश में अगले अमेरिकी राष्ट्रपति की विश्वसनीयता और वैधता पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है। इसी तरह ट्रम्प इन सवालों को खड़ा करके अमेरिका के अंदर भ्रष्ट राजनीतिक ढांचे के ख़िलाफ़ लड़ाई के नायक भी बन सकते हैं। इस तरह की स्थिति में अमेरिका के अगले राष्ट्रपति द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों पर हमेशा प्रश्न चिन्ह लगा रहेगा और यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी, उसके पास आवश्यक विश्वसनीयता नहीं होगी।

वहीं अमेरिका में एक बड़े हलके में इस पर भी चर्चा हो रही है कि यह कैसे संभव है कि देश का राष्ट्रपति इतना स्वार्थी हो कि वह अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए देश को टुकड़े-टुकड़े करने के लिए तैयार है। लेकिन यह वह चर्चा है कि जिसके लिए अलग से बात करनी पड़ेगी, क्योंकि यह एक बहुत ही व्यापक विषय है। वहीं ट्रम्प का हाल के दिनों का रवैया अमेरिका में आंतरिक विभाजन को बढ़ा रहा है। एक ऐसा विभाजन जो गृह युद्ध और यहां तक ​​कि अमेरिका के पतन का कारण भी बन सकता है। बहुत से जानकार इस स्थिति को बहुत ही ख़तरनाक मान रहे हैं और यही कारण है कि ट्रम्प के बचे हुए दिनों की समाप्ति के एक-एक दिन को गिन रहे हैं। इसका कारण यह भी बताया जा रहा है कि ट्रम्प का पागलनपन इस हद तक बढ़ सकता है कि वह व्हाइट हाउस में बने रहने के लिए हर तरह के हथकंड़े का इस्तेमाल करेंगे, यहां तक कि वह दुनिया के किसी भी देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ सकते हैं। जानकारों के अनुसार ट्रम्प ईरान, चीन और यहां तक कि रूस के साथ भी युद्ध छेड़ सकते हैं। वह चाहते हैं कि अमेरिकी सेना युद्ध में व्यस्त हो जाए और उसके बाद उनके समर्थक अमेरिका के भीतर सत्ता के प्रशासनिक ढांचे के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दें और वह स्वयं सत्ता में बने रहें।

जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिकी सेना युद्ध में व्यस्त हो जाएगी तो ट्रम्प का काम आसान हो जाएगा, नहीं तो ट्रम्प की व्हाइट हाउस में बने रहने की योजना में सबसे बड़ी रुकावट अमेरिका की सेना ही बन जाएगी। ट्रम्प के सशस्त्र समर्थकों को अगर कोई जवाब दे सकता है तो वह केवल अमेरिका की सेना ही है। इस बीच ऐसी ख़बरें भी सामने आ रही हैं कि ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर ने मोहम्मद बिन सलमान से बड़ी रक़म की मांग की है। साथ ही ऐसा भी कहा जा रहा है कि सऊदी अरब इतनी बड़ी राशि को बिना किसी फ़ायदे के अब ट्रम्प को नहीं देगा और अगर ट्रम्प इस रक़म को लेना चाहते हैं तो उन्हें इसके बदले में बिन सलमान के लिए अमेरिकी सैनिकों का ख़ून बहाना होगा। जानकारों का कहना है कि यह इस लिए कहा जा रहा है कि क्योंकि बिन सलमान चाहते हैं कि अमेरिका, ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ दे। अगर ट्रम्प के रहते अमेरिका ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ देगा तो जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद वॉशिंग्टन और तेहरान में इतनी बड़ी खाई हो चुकी होगी कि उसको बाइडेन के लिए जल्दी भरना आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि ट्रम्प के अंदर सत्ता की भड़कती आग जल्द शांत होने वाली नहीं है और वह आज कल एक ज़ख़्मी सांप की तरह हैं जो किसी को भी डस सकता है। इसलिए कहा जा रहा है कि ट्रम्प के अगले क़दम के बारे में भविष्वाणी नहीं की जा सकती है लेकिन उनके किसी भी अगले क़दम के लिए तैयार रहना ज़रूरी है।