16 दिसंबर 2020 - 16:49
आयतुल्लाह ख़ामनेई के भाषण के 10 अहम बिंदू, शहीद क़ासिम सुलेमानी की विशेषताओं के साथ-साथ ट्रम्प और ओबामा के लिए क्या कहा सर्वोच्च नेता ने....

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी के परिवार के साथ मुलाक़ात में प्रतिरोध के इस जियाले योद्धा की कई विशेषताओं पर रोशनी डाली, साथ ही उन्होंने कहा कि शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या करने वालों से इंतेक़ाम ज़रूर लिया जाएगा। सर्वोच्च नेता ने इस मुलाक़ात में देश के मज़बूत होने के महत्व और प्रतिबंधों को बेअसर बनाने पर भी प्रकाश डाला।

समाचार एजेंसी तसनीम की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने बुधवार को ईरान के महान योद्धा क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी के परिवार वालों शहीद क़ासिम सुलेमानी एवं उनके क़रीबी सहयोगी तथा इराक़ की स्वयंसेवी फ़ोर्स हशुदुश्शअबी के कमांडर शहीद अबू मेहदी अल-मोहन्दिस के शहादत दिवस के कार्यक्रम के आयोजकों से मुलाक़ात की। सर्वोच्च नेता ने इस मुलाक़ात में शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी की विशेषताएं, उनकी ज़िन्दगी और शहादत के दौर में साम्राज्य की पराजय, उनके हत्यारों से बदला, अमेरिका को लगने वाला ज़ोरदार तमाचा, सभी क्षेत्र में मज़बूत होने की आवश्यकता, शत्रू की दुश्मनी को न भूलना, अमेरिकी राष्ट्रपतियों का ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ रवैया, मतभेद फैलाने वाले बयान की आलोचना, देश में एकता बनाए रखने की ज़रूरत और प्रतिबंधों को बेअसर बनाने जैसे अहम विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

हम इस लेख में इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई द्वारा दिए गए भाषण के 10 अहम बिन्दुओं पर रोशनी डालेंगे।

1- शहीद क़ासिम सुलेमानी राष्ट्रीय हीरो और ईरानी सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतीक

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि जनरल सुलेमानी की शहादत ऐतिहासिक घटना है। उन्होंने शहीद सुलेमानी को इस्लामी समुदाय और ईरानियों के राष्ट्रीय हीरो क़रार देते हुए कहा कि, शहीद सुलेमानी इसलिए ईरानी राष्ट्र के हीरो बने और दुनिया के विभन्न वर्गों यहां तक कि उन्होंने भी जिनके बारे में सोचा भी नहीं जाता था, उनका सम्मान किया और उनके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं, क्योंकि शहीद सुलेमानी ईरानी सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतीक और ईरानी थे।

2- सुप्रीम कमांडर की ज़बानी शहीद क़ासिम सुलेमानी विशेषताएं

ईरान की आर्म फोर्सेज़ के सुप्रीम कमांडर आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामनेई ने शहीद क़ासिम सुलेमानी की प्रमुख विशेषताओं में साहस, प्रतिरोध, बुद्धिमानी, दिलेरी, बलिदान और परोपकार को गिनवाया। उन्होंने इसी तरह कहा कि वह महान शहीद एक अध्यात्मवादी और ईमानदार व्यक्तित्व के स्वामी थे और उनके अंदर किसी भी तरह का कोई पाखंड नहीं था। इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता कहा कि, इसी तरह शहीद क़ासिम सुलेमानी इस्लामी राष्ट्रों के हीरो में बदल गए, क्योंकि उस महान व्यक्ति की कोशिशें, और उनकी शहादत इस्लामी जगत में जागरुकता और प्रतिरोध के कोडवर्ड में बदल गईं हैं। इस्लामी जगत में जहां भी साम्राज्यवाद के मुक़ाबले में जब भी प्रतिरोध की बात होगी तो वहां शहीद क़ासिम सुलेमानी का नाम अवश्य लिया जाएगा।

3- जनरल क़ासिम सुलेमानी ने अपनी ज़िन्दगी और शहादत के बाद भी साम्राज्यवाद को पराजित किया

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने इस बात पर बल दिया कि, शहीद क़ासिम सुलेमानी ने अपनी ज़िन्दगी और शहादत के बाद भी साम्राज्यवाद को पराजित किया है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा था कि, अमेरिका ने क्षेत्र में 7 ट्रिलियन डॉलर लागत लगाई लेकिन उसके बावजूद उसके हाथ कुछ नहीं लगा और अंत में वह (अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प) इतना मजबूर हो गया कि रात के अंधेरे में कुछ घंटों के लिए सैन्य छावनी जा पाया। दुनिया अब इस बात को स्वीकार करती है कि अमेरिका सीरिया और इराक़ में अपने किसी भी लक्ष्य को नहीं साध पाया है।

4- खोखले वर्चस्व पर विचारिक जीत, अमेरिका के चेहरे पर ज़ोरदार तमाचा

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि, दुश्मन जनरल क़ासिम सुलेमानी की शहादत के बाद भी पराजित हुआ। उन्होंने कहा कि, इराक़ और ईरान में शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी और अबू मेहदी अल-मोहन्दिस के अंतिम संस्कार में करोड़ों लोगों की भागीदारी और उसके बाद उनकी शोक सभाओं में करोड़ों लोगों की उपस्थिति कोल्ड वॉर के जनरलों के अहंकार को हिलाकर रख दिया, यह अमेरिका के मुंह पर पड़ने वाला पहला ज़ोरदार तमाचा था। आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने कहा कि, दूसरा तमाचा इराक़ में स्थित अमेरिका की सैन्य छावनी ऐनुल असद पर हुई मिसाइलों की बारिश थी। उन्होंने कहा कि, अमेरिका को इससे ज़्यादा ज़ोरदार पड़ने वाला तमाचा साम्राज्यवाद के खोखले वर्चस्व को दी जाने वाली वैचारिक पराजय और इलाक़े से उसको निकाल फेंकना है, जो राष्ट्रों के इरादों और प्रतिरोध के नीतियों की ज़रूरत है।

5- शहीद सुलेमानी के हत्यारों से बदला लिया जाएगा, शहीद सुलेमानी का जूते का मरतबा उनके हत्यारे के सिर से ज़्यादा है

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने शहीद क़ासिम सुलेमानी की शहादत के बदले पर बल देते हुए कहा, यह सारे तमाचे बदला नहीं हैं, क्योंकि शहीद क़ासिम सुलेमानी के क़ातिलों और हत्या का आदेश देने वालों को ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ेगा और जब भी संभव हुआ यह इंतेक़ाम ज़रूर लिया जाएगा। जबकि हमारे प्रिय (हिज़्बुल्लाह सचिव हसन नसरुल्लाह) के कहे अनुसार, शहीद क़ासिम सुलेमानी के जूते का मरतबा उनके हत्यारे के सिर से ज़्यादा है।

6- सभी क्षेत्रों में मज़बूत बनें, दुश्मन पर भरोसा न करें और दुश्मन को कभी न भूलें

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने अपने भाषण के ज़रिए अधिकारियों को सिफ़ारिश की, पहली सिफ़ारिश में उन्होंने कहा कि, हर क्षेत्र में चाहे वह आर्थिक हो, या विज्ञानिक, प्रौद्योगिकी और रक्षा सब में मज़बूत बनें, क्योंकि दुश्मन कभी भी लालच और आक्रामकता को नहीं छोड़ेगा और उससे मुक़ाबले के लिए हमे मज़बूत होना ज़रूरी है। इसी तरह उन्होंने अपनी दूसरी सिफ़ारिश में कहा कि, मेरी दृढ़ सलाह यह है कि कभी भी दुश्मन पर भरोसा नहीं करना। आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने इसी तरह कहा कि, देश की जनता की समस्याओं को हल करने और देश के भविष्य को संवारने के लिए इसके या उसके वादों पर विश्वास न करें, क्योंकि वे सच्चा वादा करने वाले नहीं है बल्कि वे धोखेबाज़ हैं और साथ ही उनकी दुश्मनी को कभी न भूलना।

7- ट्रम्प के जाने से अमेरिका की दुश्मनी ख़त्म नहीं होगी

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका के राष्ट्रपतियों द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ की गईं शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों का उल्लेख करते हुए कहा कि, आपने देखा कि, ट्रम्प के अमरीका और ओबामा के अमरीका ने आपके साथ क्या किया? उन्होंने कहा कि, दुशमनी केवल ट्रम्प तक सीमित नहीं है कि उनके जाने से ख़त्म हो जाएगी, बल्कि ओबामा के अमेरिका ने भी आपके के साथ और ईरानी राष्ट्र के साथ ग़लत किया है। सर्वोच्च नेता ने कहा कि, ईरानी राष्ट्र के साथ उनके अलावा तीन यूरोपीय देशों ने भी घटियापन और दोग़लापन दिखाया है।

8- बातचीत के ज़रिए अपने आंतरिक गतिरोध को समाप्त करें

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कुछ मतभेद पैदा करने वाले बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि, अपने मतभेदों को एक दूसरे से बातचीत करके हल करें। उन्होंने कहा कि क्या आप नहीं कहते हैं कि दुनिया से वार्ता करना है, तो क्या अपने आंतरिक तत्वों के साथ विवादों को बातचीत के ज़रिए हल करना संभव नहीं है?


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9- प्रतिबंधों को बेअसर बनाना हमारे अपने हाथों में है, चार वर्षों से प्रतिबंध हटने का इंतेज़ार कर रहे हैं

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने कहा कि प्रतिबंधों को हटाना दुश्मन के हाथों में है लेकिन उसको बेअसर बनाना हमारे हाथों में है। उन्होंने कहा कि, इसलिए हमें प्रतिबंध हटवाने से ज़्यादा बेअसर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामनेई ने कहा कि, हम यह नहीं कहते कि प्रतिबंध हटवाने की कोशिश न करें यहां तक कि एक घंटे भी देरी न करें, जबकि चार वर्षों का समय बीत रहा है, काफ़ी विलंब हो गया है, कहा गया था कि वर्ष 2016 में सभी प्रतिबंधों को एक साथ समाप्त कर दिए जाएंगे, लेकिन आज न सिर्फ़ यह कि प्रतिबंध समाप्त नहीं हुए हैं बल्कि और अधिक हो गए हैं।

10- राष्ट्र की उमंगों के प्रति किटबद्धता अधिकारियों के समर्थन का आधार  

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने देश के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, यदि प्रतिबंधों को सही तरीक़े से, बुद्धिमानता से, ईरानी-इस्लामी और गरिमापूर्ण तरीक़े से उठाया जा सकता है, तो यह किया जाना चाहिए। लेकिन हमारा मुख्य ध्यान प्रतिबंधों को बेअसर करने पर होना चाहिए, जोकि आपके हाथ में है। अंत में उन्होंने कहा कि, मैं देश के अधिकारियों का समर्थन करता हूं इस शर्ते के साथ कि अधिकारी राष्ट्र की उमंगों के प्रति कटिबद्ध रहें।