15 दिसंबर 2020 - 16:16
कुख्यात आतंकी के समर्थन में आए यूरोपीय देशों को ईरान की ज़बरदस्त फटकार, जानें कैसे और कहां आतंकवाद का इस्तेमाल करता है यूरोप!

हाल ही में ईरान में एक ख़तरनाक अपराधी रूहुल्लाह ज़म, जो जासूसी सहित अनेक ख़तरनाक गतिविधियों में लिप्त था, उसको फांसी दे दी गई है। लेकिन उसकी फांसी की सज़ा पर फिर एक बार कथित तौर पर मानवाधिकार की रक्षा के बात करने वाले यूरोपीय देश सामने आ गए हैं। यह वही देश हैं जो दुनिया भर में खुले आम होते मानवाधिकार के उल्लंघन के मुख्य ज़िम्मेदार हैं। यूरोपीय देश एक ख़तरनाक अपराधी को अब पत्रकार बता कर उसका समर्थन कर रहे हैं। अब सवाल यही है कि एक ऐसा अपराधी जो बम बनाने से लेकर देश में विद्रोह का आरोपी हो और जिस

कुख्यात अपराधी रूहुल्लाह ज़म की फांसी की सज़ा की आलोचना करने वाले यूरोपीय देशों के ख़िलाफ़ ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए जर्मनी और फ्रांस के राजदूतों को ईरानी विदेश मंत्रालय में तलब कर लिया। इन दोनों देशों के राजदूतों को विदेश मंत्रालय में तलब करके क्या कहा गया इस बारे में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीब ज़ादे ने पत्रकारों को बताया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय में यूरोपीय मामलों के डायरेक्टर ने हस्तक्षेपपूर्ण बयान की वजह से योरोपीय संघ के वर्तमान अध्यक्ष के तौर पर जर्मनी के राजदूत और इसी तरह फ्रांस के राजदूत को तलब किया था और उनसे इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा। विदेश मंत्रालय में यूरोपीय मामलों के डायरेक्टर ने यूरोपीय संघ और विशेषकर जर्मनी और फ्रांस की ओर से एक कुख्यात आतंकी कि जिसको कुछ यूरोपीय देश आर्थिक और नैतिक सहायता प्रदान करते हैं, उसका समर्थन किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिस आतंकी को फांसी की सज़ा दी गई है वह एक आतंकी तत्वों का जाना पहचाना चेहरा है, जो पश्चिमी और ज़ायोनी शासन की ख़ुफ़िया एजेंसियों की ओर ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ की जाने वाली आतंकी कार्यवाहियों का एक मोहरा था। जिसको स्वयं उसने स्वीकार भी किया है। विदेश मंत्रालय में यूरोपीय मामलों के डायरेक्टर ने जर्मनी और फ्रांस के राजदूतों से पूछा कि पत्रकारिता के मापदंडों में ऐसा कौन सा मापदंड है कि जिसमें पत्रकार, पेट्रोल बम बनाना सिखाता है, सड़कों पर कैसे उपद्रव मचाया जाए सिखाता है, दंगा कैसे भड़काया जाए बताता है, विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ मिलकर ईरान की इस्लामी व्यवस्था को कैसे उखाड़ फेंका जाए बताता है और सशस्त्र आपराधिक गतिविधियों को कैसे बढ़ाया जाए यह सिखाता है? उन्होंने इसी तरह पूछा कि एक पत्रकार कैसे फ्रांस की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी, जोकि मूसाद की भी बहुत क़ीरीबी सहयोगी है संपर्क में रहता है? विदेश मंत्रालय में यूरोपीय मामलों के डायरेक्टर ने इन दोनों देशों के राजदूतों से यह भी सवाल किया कि क्या एक पत्रकार का मापदंड यह है कि वह देश की संवेदनशील जानकारियों को कि जिसमें सैन्य जानकारियां भी शामिल हैं, उनको किसी विशेष देश की ख़ुफ़िया एजेंसी के हवाले करे?

याद रहे कि, फ्रांस के अधिकारियों को कुख्यात आतंकी रूहुल्लाह ज़म द्वारा ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ अंजाम दी जाने वाली सारी गतिविधियों की ख़बर होने के बावजूद इस देश के विदेश मंत्रालय ने रूहुल्लाह ज़म की फांसी की सज़ा पर एक बयान जारी करके कहा था कि पेरिस अभिव्यक्ति की आज़ादी और प्रेस की स्वतंत्रता के इस गंभीर उल्लंघन की कड़े शब्दों में निंदा करता है और यह मौत की सज़ा अस्वीकार्य है। यह बहुत शर्म की बात है कि कुछ यूरोपीय देश वर्षों से आतंकवादियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। एमकेओ और अहवाज़िया जैसे आतंकी संगठन इन्हीं यूरोपीय देशों में वर्षों से सरकारी देख-रेख में लगातार फल-फूल रहे हैं। जैसे तुंदर आतंकी संगठन ने वर्ष 2008 में ईरान के शिराज़ में स्थित एक इमामबाड़े में बम धमाके की योजना बनाई थी, साथ ही इस आतंकी गुट ने ईरान के हर कोने में बम धमाका करने का प्लान तैयार किया था, लेकिन ईरान की ख़ुफ़िया एजेंसी ने समय रहते आतंकियों की योजना का ख़ुलासा करते हुए उसको नाकाम बना दिया था। इस आतंकी गुट में शामिल ज़्यादातर आतंकवादी यूरोपीय देशों के नागरिक थे। यह एक बहुत बड़ी विडंबना है कि यूरोप आतंकवाद को अपने हितों के अनुसार अच्छे और बुरे में बांटे हुए है और उनका अपने हितों के अनुसार इस्तेमाल करता है। घृणा, हिंसा और आतंकवाद का यह दुष्चक्र इंसानियत के ख़िलाफ़ और मानव विरोधी दृष्टिकोण की विरासत है। उससे बड़ी विडंबना यह है कि अनगिनत प्रदर्शनकारियों का दमन करने वाले उन्हें कालकोठरियों में डलवाने वाले या उनकी हत्या करवाने वाले विद्रोही तानाशा का समर्थन और उसे लिज़ियन ऑफ ऑनर अवॉर्ड देने वाला देश बड़ी बेशर्मी के साथ  लोकतंत्र और मानवाधिकार की बातें करता है।

ऐसे देश जो वर्षों से बिना किसी सवाल के यमन पर हमलावर देशों का समर्थन कर रहे हैं केवल इस लिए ताकि वह हथियारों को बेचकर मुनाफ़ा कमा सकें। एक ऐसा राष्ट्र जो सूखे और युद्ध की वजह से इस समय दुनिया की सबसे बड़ी मानव त्रास्दी का सामना कर रहा है उसका समर्थन न करके उनका समर्थन कर रहे हैं जो इंसानों के ख़ून से होली खेल रहे हैं और उसके बाद ख़ुद को मानवाधिकार का रक्षक भी बताते हैं। क्या ऐसे देशों को अपने आपको मानवाधिकार का रक्षक कहलवाने का अधिकार है? यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्च मानवीय मूल्य ऐसी सरकारों के हाथों का खिलौना बन गए हैं, जिन्होंने मानव अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित हर चीज़ को अपने अल्प अवधि के राजनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने का हथकंड़ा बना लिया है। बता दें कि क्रांति विरोधी वेबसाइट आमद न्यूज़ का संचालन करने वाले रूहुल्लाह ज़म को ईरान की सर्वोच्च अदालत द्वारा मौत की सज़ा की पुष्टि किए जाने के बाद शनिवार 12 दिसंबर को फांसी दे दी गई।