15 दिसंबर 2020 - 16:14
ब्रिटेन जनवरी से शुरू करने जा रहा है इमीग्रेशन का नया क़ानून...क्षमता और स्पेशियालिटी के आधार पर मिलेंगे प्वाइंट...यूरोपीय और ग़ैर यूरोपीय सब बराबर

ब्रिटेन जनवरी महीने से अपने इमीग्रेशन क़ानून में बुनियादी बदलाव करने जा रहा है। ब्रेक्ज़िट के बाद अब ब्रिटेन जाने वालों को प्वाइंट के आधार पर परखा जाएगा कि कौन ब्रिटेन का वीज़ा और रेज़िडेन्स हासिल करने का हक़दार है।

यह पहला मौक़ा है कि जब यूरोपीय और गैर यूरोपीय नागरिकों के लिए इमीग्रेशन की शर्तें एक समान कर दी गई हैं। पहले यूरोपीय देशों के नागरिकों को ब्रिटेन में रहकर काम करने का अधिकार हासिल होता था और इसके लिए उन्हें कोई शर्त पूरी नहीं करनी पड़ती थी।

विशेषज्ञ कहते हैं कि इस क़ानून के बाद अब ग़ैर यूरोपीय देशों के स्किल्ड मैन पावर को ब्रिटेन में ज़्यादा मौक़ा मिलेगा मगर यूरोपीयों के लिए कठिनाइयां बढ़ेंगी। इसलिए कि ब्रिटेन यूरोप की एक बड़ी अर्थ व्यवस्था है जहां अन्य यूरोपीय देशों के नागरिकों को रोज़गार मिल जाता था।

ब्रिटेन का यह क़दम ब्रेक्ज़िट का नतीजा है। ब्रिटेन जाकर रहने और वहां काम करने के इच्छुक लोगों के पास 70 प्वाइंट होने चाहिए जिनमें दस प्वाइंट अंग्रेज़ी बोलने के होंगे स्किल्ड मैन पावर के आधार पर 70 प्वाइंट दिए जाएंगे।

पीएचडी के 10 प्वाइंट होंगे जबकि साइंस व टेक्नोजी और गणित में पीएचडी के 20 प्वाइंट होंगे।

विज्ञान और तकनीक के अलग अलग क्षेत्रों के महत्व के हिसाब से उनका वर्गीकारण भी किया गया है जिसका ब्रिटेन में रहकर कम करने की अनुमति में असर होगा।