15 दिसंबर 2020 - 15:57
जनरल सुलेमानी की बेटी ज़ैनब का धमाकेदार इंटरव्यू, कहा ट्रम्प और बाइडन में कोई फ़र्क़ नहीं...

आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के पूर्व कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी की बेटी ने आरटी के साथ इंटरव्यू में कहा है कि व्हाइट से ट्रम्प के जाने और बाइडन के आने से ग्राउंड पर कुछ बदलने वाला नहीं है।

ग़ौरतलब है कि 3 जनवरी 2019 को बग़दाद एयरपोर्ट के नज़दीक जनरल सुलेमानी को ड्रोन हमले में शहीद कर दिया गया था। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने इस हमले का आदेश देने की बात स्वीकार की थी।

रूस के टीवी चैनल आरटी से बात करते हुए ज़ैनब सुलेमानी ने कहाः बाइडन और ट्रम्प के बीच कोई अंतर नहीं है, वे दोनों एक समान हैं। वे देनों एक ही नीति का अनुसरण कर रहे हैं। ट्रम्प ने मेरे पिता की हत्या का आदेश दिया था, लेकिन बाइडन ने उसका समर्थन किया था।

ग़ौरतलब है कि अमरीका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने ऐसा संकेत दिया है कि वह 2015 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते में वापस लौट सकते हैं, जिससे ट्रम्प 2018 में बाहर हो गए थे।

शहीद जनरल सुलेमानी की बेटी का कहना था कि बाइडन की पृष्ठभूमि से कई संदेह उभरते हैं, इसलिए कि यह ओबामा-बाइडन प्रशासन था कि जिसने आतंकवादी गुट दाइश को जन्म दिया था। ख़ास तौर से ईरान को लेकर अमरीका की नीति में दशकों से कोई बदलाव नहीं हुआ है, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है कि व्हाइट हाउस में कौन है।

उन्होंने कहाः अमरीका के साथ हमारी समस्या का कारण, उसकी नीति को लेकर है, यह नहीं बदलेगी। वे सभी एक ही मानसिकता और विचार के लोग हैं। हर आने वाला जाने वाले से बदतर होता है।

ज़ैनब सुलेमानी का कहना था कि ट्रम्प ने उनके पिता जनरल सुलेमानी की हत्या का आदेश इसलिए दिया क्योंकि उन्होंने क्षेत्र में अमरीकी योजनाओं पर पानी फेर दिया था, जिससे वाशिंगटन में बहुत ग़ुस्सा था।

उनका कहना था कि अमरीका जनरल सुलेमानी को एक मांस्टर मानता था, जबकि वे अपने देश और दूसरे देशों के लोगों के लिए एक मुक्तिदाता थे। मेरे पिता ने अपनी ज़िम्मेदारी अच्छी तरह से निभाई और उन्हें क्रोधित कर दिया। आप देख ही रहे होंगे कि मध्यपूर्व में जो भी योजना उन्होंने बनाई, वह नाकाम हो गई। जहां भी उन्होंने घुसकर ईरान को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश की वे नाकाम रहे। इसलिए उनके लिए मेरे पिता एक मांस्टर हैं, हालांकि वे एक मुक्तिदाता थे।

ज़ैनब सुलेमानी के अनुसार, जनरल सुलेमानी को शहीद करने के बाद अमरीका ने सोचा था कि अब सबकुछ रुक जाएगा, क्योंकि उन्होंने मध्यपूर्व की ताक़त जनरल सुलेमानी को रास्ते से हटा दिया है, लेकिन वह ग़लत थे, उनकी सोच बहुत ग़लत थी, यह तो शुरूआत है।