अमरीका में आने वाले नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यमन पर 5 बरसों से सऊदी अरब की जारी बम्बारी का समर्थन ख़त्म करने और उसे अमरीकी हथियार न देने का वादा किया है।
सऊदी शाही परिवार को ट्रम्प का बहुत ऋणी होना चाहिए जिन्होनें न सिर्फ़ जमाल ख़ाशुक़्जी हत्या केस में युवराज बिन सलमान को बचाया, बल्कि उसे खुला राजनैतिक समर्थन दिया और अरबों डॉलर के हथियार दिए।
बाइडेन के लिए यमन जंग को रुकवाने के लिए, ओबामा के शासन काल की तुलना में जिसमें वह उपराष्ट्रपति थे, या जब वे सेनेटर थे, अधिक राजनैतिक प्रतिबद्धता दिखानी होगी।
अमरीका की नीतियों में बद्लाव की मांग करने वालों में ट्रम्प की जगह आने वाले बाइडेन भी हैं, जो ट्रम्प पर सऊदी फ़ोर्सेज़ को ख़तरनाक ब्लैंक चेक देने का इल्ज़ाम लगा चुके और पांच साल से यमन पर जारी बम्बारी का समर्थन ख़त्म करने का बारंबार वादा कर चुके हैं।
अगर ऐसा होता है, तो इसका सऊदी गठबंधन पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। उसका बम्बारी अभियान अमरीका और ब्रिटेन से मिलने वाले सैन्य व राजनैतिक समर्थन तथा हथियार बेचने वाली दूसरी सरकारों की वजह से मुमकिन हुआ।
सऊदी अरब के पास आधुनिक हथियारों की इंडस्ट्री नहीं है। वह दुनिया में हथियार ख़रीदने वाला सबसे बड़ा देश है, जिसका बड़ा भाग वह अमरीका से ख़रीदता है।
सऊदी अरब में अमरीका के पूर्व राजदूत रॉबर्ट जॉर्डन के मुताबिक़, अगर अमरीका, सऊदी एयरफ़ोर्स को एफ़-15 फ़ाइटर जेट के पुर्ज़े देना बंद कर दे तो ये फ़ाइटर जेट 2 हफ़्ते के भीतर पार्क हो जाएंगे।
यही बात ब्रुकलिन इंस्टीट्यूशन थिंक टैंक के सदस्य ब्रूस रीडल के भी हैं। उनका कहना है कि सऊदी फ़ोर्सेज़ अमरीका और ब्रिटेन के समर्थन के बिना ऑप्रेशन नहीं कर सकती।
यमन जंग से बड़ी तबाही हुयी है। हज़ारों नागरिक मारे गए। अमरीकी बमों और मीज़ाईल पूरे यमन में मुख्य इन्फ़्रास्ट्रक्चर को तबाह कर दिया है। हेल्थ केयर सिस्टम ठप्प पड़ गया है।
जंग का समर्थन करने वाली लॉबी का विरोध
इस बात में शक नहीं कि अगर बाइडेन यमन जंग में सऊदी अरब को अमरीकी हथियार न बेचने के वादे पर अमल करने की दिशा में क़दम उठाएंगे तो अमरीका में हथियारों की लॉबी इसके विरोध में एड़ी चोटी का ज़ोर लगा देगी।
कुछ और भी बातें हैं जिससे बाइडेन के वादे पर शक होता है, ख़ास कर इस बात के मद्देनज़र कि जिस वक़्त यमन जंग शुरू हुयी थी, उस वक़्त बाइडेन उपराष्ट्रपति थे और उस वक़्त वाइट हाउस ने इसे रोकने के लिए ज़रूरी क़दम नहीं उठाए।
अब जबकि कई योरोपीय देशों ने सऊदी अरब को हथियार बेचना कम कर दिया है, ब्रिटेन अगर हथियार बेचना जारी रखता है दो वह इस निर्दयी हस्तक्षेप का समर्थन करने वाला अकेला देश बचेगा। ऐसा हस्तक्षेप जिसने यमन में दुनिया की सबसे ख़तरनाक मानव त्रासदी को जन्म दिया है।
बाइडन उस तंत्र से दशकों से जुड़े हुए हैं जिसने इस तरह की नीतियों को फलने फूलने दिया। अब जबकि वह अपने करियर का अंतिम रोल निभाने वाले हैं, हो सकता है कि वह इस समर्थन को ख़त्म करके एक प्रभावशाली नमूना क़ायम करने वाले बन जाएं। (साभार मिडिल ईस्ट आई)