हमें अमरीका के हारे हुए राष्ट्रपति ट्रम्प के ट्वीट से कोई हैरत नहीं हुई जिसमें उन्होंने इस्राईल और मोरक्को के बीच संबंध स्थापना की सूचना दी क्योंकि सारी तैयारियों से इसका अनुमान बहुत पहले से लगाया जा रहा था। जार्डन और यूएई ने सहरा के ऊयून नगर में अपने अपने कांस्लेट खोलने का एलान किया था इसके अलावा ट्रम्प के दामाद, जेर्यड कुशनर ने मोरक्को की यात्रा भी की थी जहां उनका बहुत मोरक्को नरेश ने गर्मजोशी से स्वागत किया गया था और इस्राईली पर्यटकों की यात्राओं में असाधारण रूप से वृद्धि हो गयी थी।
इस्राईल और मोरक्को के बीच होने वाला यह समझौता, शांति के बदले भूमि के फार्मूले के तहत किया गया है लेकिन पश्चिमी सहरा के लिए, फिलिस्तीनी भूमियों के लिए नहीं। अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने ट्वीट में सहरा पर मोरक्को के संपूर्ण अधिकार को औपचारिक रूप से स्वीकार किया और मोरक्को तथा सहरा के क्षेत्र में विकास के लिए पुंजीनिवेश का वादा किया और इसी तरह इस्राईली एयर लाइन ने औपचारिक रूप से एलान किया कि वह मोरक्को के लिए हर हफ्ते 20 फ्लाइट्स शुरु करने जा रही है। अभी देखें आगे और क्या क्या होता है?
हमेशा झूठ बोलने वाले ट्रम्प ने यह बात बिल्कुल सही कही थी कि इस्राईल से संबंध सामान्य बनाने की लाइन में 9 अरब देश हैं। उन्होंने बताया था कि यूएई, बहरैन, सूडान, सऊदी अरब, क़तर, ओमान, मोरक्को, ट्यूनेशिया और मोरिटानिया, इस्राईल से संबंध बनाएंगे। अब हम देख रहे हैं कि इस लिस्ट में शामिल देश, एक के बाद एक, इस्राईल से संबंध बना रहे हैं। हमें तो यह भी लगता है कि सऊदी अरब और क़तर के बीच जो कुशनर ने सुलह करायी है वह भी इस्राईल के साथ संबंध बनाने की भूमिका हो सकती है क्योंकि मोरक्को और इस्राईल के बीच संबंधों के एलान के कुछ ही मिनट बाद कुशनर ने एलान किया कि सऊदी अरब और इस्राईल के बीच संबंध भी निश्चित है हालांकि मनामा सम्मेलन में सऊदी अरब के शाही घराने के प्रभावशाली सदस्य तुर्की अलफैसल ने इस्राईल को खूब खरी खोटी सुनाई थी और उसे जम कर लताड़ा था मगर हो सकता है कि बाद में यह कहा जाए कि तुर्की फैसल, सऊदी अरब में कोई सरकारी पदाधिकारी नहीं हैं और वह सऊदी सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

इस्राईल के इंटलिजेंस के मंत्री एली कोहन ने पहले ही कहा था कि सऊदी अरब, क़तर और मोरक्को, इस्राईल के साथ संबंध स्थापित करने वाले देशों में शामिल हैं तो अब जब मोरक्को ने संबंध बना लिये हैं तो क्या हम सऊदी अरब और क़तर के बारे में यह समझें कि वह भी ट्रम्प के वाइट हाउस से निकलने से पहले इस रास्ते पर आगे बढ़ जाएंगे?
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प देशी विदेशी हर मामले में जमकर झूठ बोलते हैं। वाशिंग्टन पोस्ट ने उनके 3 हज़ार झूठों की लिस्ट बनायी है जिनमें से एक हज़ार तो कोरोना वायरस के बारे में है लेकिन अनुभवों और एक के बाद एक अरब देशों की ओर से इस्राईल के साथ संबंध बनाने की खबरों से लगता है कि मध्य पूर्व और इस क्षेत्र की सरकारों के बारे में उनकी बातें काफी हद तक सही होती हैं जिसकी एक बड़ी वजह, अधिकांश अरब सरकारों की कमज़ोरी और अमरीका व इस्राईल के आदेशों के पालन के लिए उनकी तत्परता है।
यह तो साफ ज़ाहिर है कि अक्सर अरब सरकारें, चाहे वहां राजशाही हो या प्रजातंत्र, सब की सब आर्थिक समस्याओं में ग्रस्त हैं और उन्हें भ्रष्टाचार और फिलिस्तीनियों के बारे में अपनी नाकाम नीतियों की वजह से असुरक्षा का आभास हो रहा है लेकिन यह भी सच्चाई है कि इन्हें जो भी आर्थिक मदद मिलेगी वह एक तरह से अरब सरकारों की ही दौलत होगी जो हथियारों के सौद से उनसे ली गयी होगी।
इस वक्त इस्राईल और अरबों का मोर्चा बन रहा है जिसका मक़सद, प्रतिरोध मोर्चे का मुक़ाबला करना है जिसका नेतृत्व ईरान कर रहा है। जिस तरह से आज इस्राईल से संबंध के लिए अरबों का धन खर्च किया जा रहा है उसी तरह ईज्ञान के खिलाफ युद्ध भी अरबों की भूमि पर होगा जहां अमरीकी छावनियां मौजूद हैं और इस प्रकार के किसी भी युद्ध की सब से बड़ी बलि अरब देशों की जनता बनेगी।

हम तो इस प्रकार के संबंध बनाने की खबरों से चौंकते नहीं लेकिन यह ज़रूर है कि इस्राईल से संबंध बनाने वाले अरब देशों के नेता जब इस्राईल के साथ संबंधों की क़ीमत अपने देश में शांति के रूप में अदा करेंगे तब उन्हें फिलिस्तीन से गद्दारी की सज़ा पर चौंकाना होगा।
अंत में हम यह कहना चाहते हैं कि मोरक्को और इस्राईल के बीच होने वाला समझौता, इस्राईलियों के लिए शांति का कारण बन सकता है लेकिन मोरक्को के लिए तो यह अशांति का ही कारण है बल्कि यह भी हो सकता है कि मोरक्को युद्ध के भंवर में भी फंस जाए जिसकी चिंगारी कई वर्षों से सुलग रही है और उसे सुलगाने वाले भी अमरीका और युरोपीय देश हैं।
हमारा इस्लामी और अरब जगत आज जिस अपमानजनक स्थिति में है वह उससे अधिक भयानक परिस्थितियों का सामना कर चुका है लेकिन हर बार वह गौरव के साथ संकट से पार लगा है और हमें इस बात में तनिक भी शक नहीं है कि वह इस बार भी गौरव के साथ निकल जाएगा। हमें यक़ीन है अरब और इस्लामी जगत, अपमान व तुच्छता के मलबों को हटा कर एक बार फिर विजयी रूप में गौरव के साथ खड़ा होगा।