शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने, टेक्सस के अटॉर्नी जनरल की उन राज्यों के दसियों लाख वोटों को, जहाँ कड़ा मुक़ाबला था और वोट बाइडन के हक़ में गए, ब्लॉक करने की कोशिश को रद्द कर दिया।
पिछले 4 साल से राष्ट्रपति ट्रम्प सुप्रीम कोर्ट की ईमानदारी को चुनौती देते रहे।
उनकी दलीलों ने क़ानून के दायरे को बढ़ाया और उनके आग्रह ने एक एक जज की निष्पक्षता को टेस्ट किया। लेकिन ट्रम्प के नवंबर के राष्ट्रपति पद के चुनाव पर मूल्यहीन हमले और जो बाइडन के मुक़ाबले में हारने के बाद टेक्सस के अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर हुआ बेशर्मी भरा मुक़द्दमा, कोर्ट को नए अधिकार में ले आया।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा समर्थित केस को ख़ारिज कर दिया। अब तीन दिन बचे हैं इलेक्टोरल कॉलेज की ओर से बाइडन की नवंबर के चुनाव में जीत पर मुहर लगने में।
सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जिनमें से 6 रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों में तीन ट्रम्प की ओर से नियुक्त हुए थे, ख़ुद को कट्टर समर्थकों के पैटर्न से हटा लिया जो कोर्ट से मांग कर रहे थे कि मतदान में धांधली के निराधार दावों को, दसियों लाख वोटों को मताधिकार से वंचित करने के लिए इस्तेमाल करे।
टेक्सस के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन और ट्रम्प ने उन 18 राज्यों के अटॉर्नी जनरलों और कॉन्ग्रेस में 126 रिपब्लिकन मिम्बरों को उस तर्क पर दस्तख़त के लिए तय्यार कर लिया था जिससे पेन्सिलवेनिया, जॉर्जिया, मिशिगन और विस्कॉन्सिन में वोटरों के फ़ैसले उलट जाते।
अगर जजों ने टेक्सस सहित रिपब्लिकन्स की अगुवाई वाले राज्यों के निवेदन को रद्द न किया होता तो वे अपने ही पिछले फ़ैसलों का अनादर करते और निष्पक्षता से सौदा कर लेते।
ट्रम्प बार बार यह कह कर जजों की निष्पक्षता को संदेह के दायरे में ला रहे थे कि अगर उनका केस उस बेन्च के पास जाता है जिसमें कन्ज़र्वेटिव ज़्यादा हैं, तो वे विजयी होंगे। वह बार बार यह इशारा कर रहे थे कि डेमोक्रेट राष्ट्रपतियों की ओर से नियुक्त जज उनके ख़िलाफ़ फ़ैसला देंगे जबकि रिपब्लिकन्स राष्ट्रपतियों की ओर से नियुक्त जज उनका साथ देंगे।
चुनाव के केस में, सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने भी टेक्सस के अटॉर्नी और ट्रम्प के चुनाव में धांधली पर आधारित इसरार पर कोई ध्यान नहीं दिया। शुक्रवार के आदेश पर कोई दस्तख़त नहीं थे, जिससे ट्रम्प को साफ़ मैसेज है कि बहुत हो गया, अब आप ख़ामोश हो जाइये!!!