राज्यपाल के कार्यालय ने ये पुष्टि की है कि उन्होंने केरल पुलिस अधिनियम में नई धारा 118 (ए) जोड़ने के प्रावधान को मंज़ूरी दे दी है।
विभिन्न कार्यकर्ता और राजनीतिक दल केरला सरकार के इस क़दम की आलोचना कर रहे हैं और इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलने और सोशल मीडिया पर अंकुश लगाने के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह क़ानून बोलने की आज़ादी की दिशा में बड़ा ख़तरा हो सकता है, क्योंकि यह पुलिस को काफ़ी शक्तियां प्रदान करता है और मीडिया की आज़ादी को निंयत्रित करता है।
हालांकि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का कहना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ते अपमानजनक पोस्ट को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लिया गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, 2015 में एक्ट की एक अन्य धारा 118(डी) के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले केरल स्थित वकील अनूप कुमारन ने कहा है कि वे इस अध्यादेश के ख़िलाफ़ भी हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118 (डी) को ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे बोलने एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन क़रार दिया था।