21 नवंबर 2020 - 16:45
क्या व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले ट्रम्प ईरान पर हमला कर सकते हैं?

पिछले हफ़्ते न्यूयॉर्क टाइम्स ने पेंटागन के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया था कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने हाल ही में पेंटागन से ईरान के परमाणु संयंत्रों पर बमबारी करने के संभावित विकल्पों के बारे में पूछा था। हालांकि उनके सैन्य सलाहकारों ने ऐसे किसी भी क़दम के प्रति चेतावनी देते हुए कहा था कि यह हमला एक व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है।

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रम्प प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि चुनाव में हार का सामना करने वाले निराश ट्रम्प अगर कोई भी ऐसी ग़लती करेंगे, तो उसका मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा।   

हालांकि मीडिया हलक़ों में अभी भी यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले और अपने शासनकाल के अंतिम दिनों में ट्रम्प ईरान पर हमला करने का आदेश दे सकते हैं? अगर वह ऐसा करते हैं तो क्या पेंटागन को उनके आदेश का पालन करना होगा?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प चुनाव में मिली हार से काफ़ी निराश हैं और चुनावी परिणामों को पलटने की उनकी हर चाल नाकाम हो रही है, दूसरी ओर ईरान के ख़िलाफ़ अधिकतम दबाव की उनकी नीति, तेहरान को एक नए समझौते के लिए झुकाने में विफल रही है, इसलिए वह झुंझलाहट में ऐसी मूर्खता कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वह ऐसा कोई आदेश देते हैं तो अमरीकी क़ानून के मुताबिक़, यह कोई ग़ैरकानूनी आदेश नहीं होगा, क्योंकि राष्ट्रपति को प्राप्त युद्ध के अधिकार के तहत वह कांग्रेस के अनुमोदन के बिना 60 दिनों तक अमरीकी सेना को युद्ध करने का आदेश दे सकता है।

फ़ॉरेन पालिसी पत्रिका का कहना है कि दुर्भाग्य से, सभी बुरे विचार ग़ैर क़ानूनी नहीं होते हैं। मीडिया हलक़ों में ऐसी अफ़वाहें तैर रही हैं कि ट्रम्प, ईरानी परमाणु साइटों पर हमला कर सकते हैं, या वह इस्राईल को ऐसा करने के लिए हरी झंडी दिखा सकते हैं, हालांकि वास्तव में यह एक भयानक विचार है।

वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की परमाणु साइटों पर बमबारी के जोखिम से ईरान की परमाणु प्रगति को स्थायी रूप से नहीं रोका जा सकता है, इसलिए कि ईरान की मुख्य परमाणु साइटें, भूमिगत हैं। हां, इस क़दम से क्षेत्र में एक ऐसा टकराव शुरू हो सकता है, जो अभी तक हुए सभी संघर्षों से कहीं अधिक व्यापक और भयानक होगा।

दूसरे यह कि ईरान ने अमरीका के परमाणु समझौते से निकलने और प्रतिबंध लगाने के बाद, हालांकि अपनी कुछ प्रतिबद्धताओं को कम किया है, लेकिन अभी भी वह परमाणु समझौते से जुड़ा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए से सहयोग कर रहा है। इसलिए ट्रम्प प्रशासन की कोई भी सैन्य कार्यवाही, अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन होगी, जिसके भयानक परिणामों से अमरीका को आसानी से छुटकारा नहीं मिल सकेगा।