फ़्रांस के राष्ट्रपति ने देश के मुस्लिम नेताओं को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है कि वह फ़्रांस में उनके कथानानुसार कट्टरपंथ को रोकने के लिए पेरिस के प्रस्तावित क़ानून को स्वीकार कर लें।
मैक्रां की ओर से यह अल्टीमेटम फ़्रांस में सरकार से संपर्क के लिए मुसलमानों की स्वीकृत बॉडी "फ़्रेन्च काउंसिल आफ़ मुस्लिम फेथ" को दिया गया है।
फ़्रेंच काउंसिल आफ़ मुस्लिम फ़ेथ ने नेश्नल काउंसिल आफ़ इमाम के गठन पर सहमति जता दी है जिसके अंतर्गत मस्जिदों के इमामों की नियुक्ति सरकारी तौर पर होगी और उन्हें काउंसिल की ओर से अपदस्थ भी किया जा सकेगा।
दाइश जैसे कट्टरपंथी गुटों का समर्थन करने के लिए अपनी गुप्त और खुल्लम खुल्ला कार्यवाहियों के बाद फ़्रांस ने त्वरित कार्यवाही के रूप में संसद में एक समग्र विधेयक पास कराने का फ़ैसला किया है ताकि मैक्रां के अनुसार कट्टरपंथ को रोका जा सके, मैक्रां के प्रस्ताव क़ानून के अंतर्गत फ़्रांस में घरेलू शिक्षा पर प्रतिबंध होगा।
फ़्रांस के राष्ट्रपति की ओर से यह अल्टीमेट एक ऐसे समय में सामने आया है कि जब पैग़म्बरे इस्लाम (स) का अनादर करने वालों के समर्थन के कारण मुसलमानों में काफ़ी रोष पाया जाता है।