15 नवंबर 2020 - 13:22
क्या नीतीश कुमार एक बार फिर मारेंगे पलटी, बिहार में सबकुछ ठीक नहीं!

बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में जहां एक ओर राष्ट्रीय जनता दल सहित उसके सभी सहयोगी दल चुनावी नतीजों में धांधली का आरोप लगा रहे हैं वहीं भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के बीच भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और इसीलिए टीकाकारों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मारेंगे?

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के राज्य बिहार चुनाव में जीत के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं की पटना में रविवार को अहम बैठक होने वाली थी। इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना जाना था। लेकिन अचानक कार्यक्रम बद गया अब पहले बीजेपी के विधायक दल की बैठक होगी पहले उसमें विधायक दल के नेता का चयन होगा और उसके बाद एनडीए के विधायक दल की बैठक होगी। इन दोनों बैठकों में बीजेपी के दिग्गज नेता और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भाग लेंगे। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इन बैठकों में हिस्सा लेंगे। वैसे इस समय बिहार में राजनीतिक सरगर्मी काफ़ी तेज़ है। जहां एनडीए की सरकार को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं। वहीं जेडीयू विधायक दल की बैठक में शामिल होने के लिए पार्टी के विधायक मुख्यमंत्री आवास पहुंचने लगे हैं। विधायकों ने एक स्वर से कहा सिर्फ और सिर्फ नीतीश कुमार ही हमारे नेता हैं। साथ ही कई विधायकों ने एलजेपी को एनडीए से बाहर करने की मांग भी की।

इस बीच जानकारों का मानना है कि, जो चुनाव परिणाम आए हैं उससे साफ़ था कि अगर भाजपा अपने वादे से पीछे हटेगी तो राज्य में महगठबंधन की सरकार बननी तय हैं क्योंकि फ़ासला मात्र छह विधायकों का हैं। लेकिन कई लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि आख़िर भाजपा जो एनडीए में सबसे बड़ा घटक दल बनकर उभरा है क्योंकि उसके पास नीतीश कुमार के 43 विधायक की तुलना में 74 विधायक हैं, उसके बाद भी ताज नीतीश कुमार के सिर पर पहनाने की क्या मजबूरी हैं? हालांकि भाजपा के नेताओं का कहना हैं कि यह सवाल इसलिए बेमानी हैं क्योंकि चुनाव से पहले ही इस विषय पर हर तरह के अटकलों को विराम देते हुए साफ़ कर दिया गया था कि कोई किंतु परंतु नहीं संख्या जो भी हो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनेंगे। चुनाव परिणाम आने के बाद या चुनाव के दौरान नीतीश कुमार ने इतना ही कहा कि उन्होंने इस विषय पर कभी कुछ नहीं कहा जो भी बात आई हैं वो भाजपा नेताओं के तरफ़ से आई हैं। लेकिन चुनाव नतीजे से एक और बात साफ़ हो गयी है कि चिराग़ पासवान के कंधे पर बंदूक रखकर बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनने सपना बीजेपी का पूरा तो नहीं हो पाया नहीं तो आज बीजेपी नेताओं के सुर कुछ और होते।

यह बात किसी से छिपी नहीं कि चिराग़ पासवान की पीठ पर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व का हाथ था नहीं तो वह चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या भाजपा के अन्य नेता भाषण में जब विरोधियों का नाम लेने की बारी आती थी तो चिराग़ पासवान का नाम सब भूल जाते थे जिससे ज़मीन पर और अधिक कन्फ़्यूज़न बढ़ा। इसके अलावा जनता दल यूनाइटेड के नेता कहते हैं भाजपा ने कैसे जैसे पर्दे के पीछे से केंद्रीय एजेन्सी जैसे आयकर विभाग या ईडी की कारवाई में जनता दल यूनाइटेड के नेताओं को निशाना बनाया उससे साफ़ था कि ऐसा नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ चिराग़ पासवान को मज़बूत करने के लिए किया जा रहा हैं। इस पृष्ठभूमि में भाजपा के नेता दबी ज़ुबान से स्वीकार करते हैं कि उनका अपने बलबूते अस्सी से नब्बे सीट जीतने का लक्ष्य एक ओर ना सिर्फ धरा का धरा रह गया बल्कि चिराग़ पासवान के माध्यम से नीतीश कुमार को तीस से पैंतीस सीट पर रोके रखने की पूरा योजना भी विफल हो गई। जिसके आधार पर उन्होंने अपना मुख्यमंत्री बनाने का लक्ष्य रखा था। ऐसे में जब सच्चाई की परत हर दिन खुल रही हैं वैसे में भाजपा नेता मान रहे हैं कि नीतीश को बिहार का मुख्यमंत्री बनाना केवल उनकी मजबूरी ही है।

इस बीच कई राजनैतिक टीकाकार इस संभावना से भी इंकार नहीं कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कुछ ऐसा भी हो सकता है कि जिसके बारे में कम ही लोग सोच रहे हैं। टीकाकारों के अनुसार, नीतीश कुमार का इस बार मुख्यमंत्री पद का संभालना कोई आसान काम नहीं होगा, क्योंकि उनके विधायक कम हैं और बीजेपी के ज़्यादा हैं तो यह स्वाभिक है कि बीजेपी के कोटे से मंत्री भी ज़्यादा होंगे और जब ऐसा होगा तो नीतीश कुमार को अपने फ़ैसले लेने में भी दबाव का सामना करना पड़ेगा। यही वह कारण हैं कि जिसकी वजह से नीतीश कुमार ने इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल का साथ छोड़ दिया था और बीजेपी का साथ पकड़ लिया था। अब एक बार फिर नीतीश के समने वही स्थिति है और अगर बीजेपी ने नीतीश कुमार पर ज़्यादा दबाव बनाया तो वह एक बार फिर पलटी मारते हुए आरजेडी का बाहर से समर्थन करके तेजस्वी यादव की सरकार बनवा सकते हैं। बहरहाल यह सारी बातें अभी केवल संभावनाओं के आधार पर कही जा रही हैं वास्तविक्ता क्या होने वाली है यह आने वाला समय ही बताएगा।