पोम्पेयो दस दिन के लंबे दौरे पर निकल रहे हैं जिसमें वह यूरोप और पश्चिमी एशिया के देशों के नेताओं से मिलेंगे। पोम्पेयो फ़्रांस, तुर्की, जार्जिया, इस्राईल, इमारात, क़तर और सऊदी अरब जाएंगे। मैक्रां, नेतनयाहू और मुहम्मद बिन सलमान सहित जिन नेताओं से पोम्पेयो की मुलाक़ातें अपेक्षित हैं लगभग वह सब जो बाइडन को राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दे चुके हैं। इन नेताओं को भी अच्छी तरह पता है कि बाइडन सत्ता संभालेंगे तो ट्रम्प शासन काल से बिल्कुल भिन्न रुख़ पर काम करेंगे।
पोम्पेयो की इस यात्रा के उद्देश्य के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि वह इस प्रकार की नीतियों को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें हटाना बाइडन के लिए कठिन हो जाए। ख़ास तौर पर ईरान के मामले में पोम्पेयो को बड़ी चिंता है। ट्रम्प प्रशासन ने बेहद कठोर प्रतिबंध ईरान पर लगाए और लगातार दावे किए कि प्रतिबंध बहुत कारगर साबित हो रहे हैं मगर वह ईरान को वार्ता की मेज़ पर बैठने के लिए मजबूर नहीं कर सके। यही नहीं ईरान के सुप्रीम लीडर ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिन्ज़ो अबे से तो साफ साफ़ कह दिया कि हम ट्रम्प को इस लायक़ समझते ही नहीं कि उनसे संदेशों का आदान प्रदान करें। शिन्ज़ो अबे ट्रम्प का संदेश लेकर तेहरान की यात्रा पर पहुंचे थे।
अब बाइडन अगर ईरान के मामले में ट्रम्प के फ़ैसलों को बदलते हैं तो इससे ट्रम्प प्रशासन ही नहीं उनसे वैचारिक समानता रखने वाले रिपब्लिकन पार्टी के अन्य नेताओं की भी बदनामी होगी।
इस मिशन में पोम्पेयो व्यक्तिगत रूप से भी कुछ फ़ायदा हासिल करने की कोशिश में हैं। कहा जाता है कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव मैं हिस्सा लेने की उनकी मंशा है और अगर जाते जाते वह इस्राईली नेताओं को ख़ुश कर ले गए तो उन्हें अमरीका के भीतर यहूदियों का समर्थन मिल जाएगा। यही वजह है कि पोम्पेयो उन फ़िलिस्तीनी इलाक़ों का दौरा भी करना चाहते हैं जिन पर इस्राईल के क़ब्ज़े को विश्व समुदाय ग़ैर क़ानूनी मानता है। वरना पोम्पेयो को भी मालूम है कि बचे हुए 68 दिनों में वह कोई भी एसी नीति स्थापित नहीं कर सकते जिसे बदलना असंभव हो।
पोम्पेयो को मालूम है कि जो बाइडन के शासन काल में सऊदी अरब की सरकार उस तरह निश्चिंत होकर मनमानी नहीं कर सकती जिस तरह ट्रम्प काल में उसने की है इसलिए पोम्पेयो सऊदी सरकार को भी यह विकल्प सुझाने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह बाइडन के शासनकाल तक संयम दिखाए और उसके बाद 2024 के चुनावों में पोम्पेयो के समर्थन में अपनी लाबियों का इस्तेमाल करे।