बयान में कहा गया है कि पश्चिमी सहरा में हथियार रहित इलाक़े अलकरकरात में पोलिसारियो फ़्रंट के छापामारों की भड़काऊ, ख़तरनाक और अस्वीकार्य कार्यवाहियों के बाद उनके ख़िलाफ़ सैन्य क़दम उठाने का फ़ैसला किया गया। मोरोको के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि रबात ने अधिकतम संयम के बाद ही इन कार्यवाहियों का जवाब देने का फ़ैसला किया है और उसके पास इस क्षेत्र में स्वतंत्र परिवहन को फिर से बहाल करने के लिए इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था।
मोरोको ने पोलिसारियो फ़्रंट पर आरोप लगाया है कि वह 21 अक्तूबर को अलकरकरात के क्षेत्र में घुस गया है और अब इस क्षेत्र में वस्तुओं व लोगों की आवाजाही को रोक रहा है। दूसरी ओर पोलिसारियो फ़्रंट ने मोरोको पर संघर्ष विराम के समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है जो सन 1991 से इस क्षेत्र में लागू था। फ़्रंट ने कहा है कि उसके लड़ाकों ने मोरोको सरकार द्वारा संघर्ष विराम के समझौते के उल्लंघन का जवाब दिया है। पोलिसारियो फ़्रंट ने इससे पहले भी धमकी दी थी कि अगर मोरोको की सरकार ने मोरितानिया व पश्चिमी सहरा की संयुक्त सीमा पर स्थित अलकरकरात के इलाक़े में लोगों या सैनिकों को भेजा तो वह संघर्ष विराम समझौते को रद्द कर देगा।