12 नवंबर 2020 - 12:02
कोरोना वायरस की वैक्सीन के बारे में सात महत्वपूर्ण बातें जिनका जानना है ज़रूरी...दो बुरी ख़बरें भी!

अमरीकी कंपनी फ़ायज़र और जर्मन कंपनी बायो एनटेक ने हाल ही में एलान किया है कि उन्होंने मिलकर कोरोना वायरस का वैक्सीन तैयार किया है जो 90 प्रतिशत तक कारगर साबित हुआ है तो इस वैक्सीन के बारे में कुछ बातें जान लेना ज़रूरी है।

-1 वैक्सीन कैसे काम करता है?

इस वैक्सीन का पूरा आइडिया मानव शरीर में एक पदार्थ इंजेक्ट किए जाने पर आधारित है जिसका नाम आरएनए मेसेन्जर है। यह पदार्थ हमारे शरीर के भीतर मौजूद कोशिकाओं को वह एंटी बाडी तैयार करने का आदेश देता है जिसकी हमारे शरीर को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए ज़रूरत है। यह पदार्थ कोशिकाओं की सतह पर एक स्पाइक पैदा करता है जिससे हमारे शरीर के एम्युन सिस्टम को यह संदेश जाता है कि वह एंटी बाडी तैयार करे। और यह पदार्थ एक विशेष समय तक हमारी कोशिकाओं की सतह पर मौजूद रहता है।

-2 अब तक हुए टेस्ट का ब्योरा क्या है?

जुलाई में दोनों कंपनियो ने इसका क्लिनिकल टेस्ट शुरू किया। जिन लोगों को टेस्ट में शामिल किया गया था उनमें से आधी संख्या को यह वैक्सीन दिया गया जबकि आधी संख्या को साल्ट वाटर का इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद दोनों कंपनियों ने अध्ययन किया कि वैक्सीन क्या कोई संरक्षण उत्पन्न कर रहा है या नहीं? देखने में यह आया कि जिन 44 हज़ार लोगों ने इस टेस्ट में भाग लिया उनमें से केवल 94 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए। इससे साबित हो गया कि यह वैक्सीन 90 प्रतिशत से ज़्यादा कारगर साबित हुई है।

-3 क्या यह अच्छा रेज़ल्ट है?

जवाब है हां बहुत अच्छा है। अगर वैक्सीन इतना कारगर है तो यह करोड़ों लोगों को बीमारी से सुरक्षित रख सकेगा।

-4 यह वैक्सीन कब तक आम इंसानों को उपलब्ध हो सकेगा?

दोनों कंपनियां अमरीका के संबंधित विभाग से औपचारिक अनुमति की प्रतीक्षा कर रही हैं और अनुमति मिलते ही नवंबर के तीसरे हफ़्ते तक वैक्सीन का उत्पादन शुरू हो जाने की संभावना है और ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी कर लेने के बाद इसी साल के आख़िर तक या 2021 के शुरू में यह वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी।

-5 उत्पादन की क्या मात्रा है?

कंपनी का कहना है कि अगर औपचारिकताएं पूरी हो गईं तो इसका उत्पादन तेज़ गति से और बड़े पैमाने पर हो सकता है। वर्ष 2020 की समाप्ति तक दोनों कंपनियां कम से कम पांच करोड़ डोज़ तैयार कर लेने की अपेक्षा कर रही हैं। हर व्यक्ति को दो डोज़ की ज़रूरत होगी। अगले साल यह कंपनी 1 अरब तीस करोड़ डोज़ तैयार करेगी।

-6 सबसे पहले यह वैक्सीन किसे मिलेगा?

कंपनी का कहना है कि इस साल के आख़िर तक उसके पास 4 करोड़ डोज़ उपलब्ध होंगे। यह डोज़ सबसे पहले उन लोगों को दिए जा सकते हैं जिनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की ज़्यादा आशंका है। इनमें चिकित्सा विभाग से जुड़े लोग, उम्र दराज़ लोग और मोटापे और डायब्टीज़ के बीमार शामिल हैं।

-7 क्या मास्क से निजात मिल जाएगी?

जवाब है नहीं, विशेषज्ञ कहते हैं कि जब वैक्सीन व्यापक रूप से तैयार करके वितरित कर दिया जाएगा तब भी मास्क पहनने जैसे सावधानी के उपाय जारी रखना होगा। यह सिलसिला उस समय तक चलेगा जब तक पूरे विश्व समुदाय में इस वायरस का ख़तरा पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो जाता।

दो बुरी ख़बरें

-1 वैक्सीन को विशेष तापमान में रखना ज़रूरी है।

अगर वैक्सीन के असर को सुरक्षित रखना है तो इसे -75 डिग्री तापतान में रखना होगा। बहुत कम ही चिकित्सा केन्द्र और अस्पताल होंगे जहां बर्फ़ का भंडार हो और फ़्रीज़िंग सिस्टम हो जो बहुत कम तापमान का वातावरण तैयार करे।

-2 यह वैक्सीन कोई जादुई समाधान नहीं है जो आनन फ़ानन में मिल जाएगा

यह वैक्सीन कुछ महीनों के भीतर सबको नहीं मिल पाएगा जिसका मतलब यह है कि अभी यह वायरस बहुत से लोगों की जान लेगा।

स्रोतः अलजज़ीरा+एजेंसियां+फ़्रांसीसी मीडिया+फ़ारेन पालीसी+न्यूयार्क टाइम्ज़