9 नवंबर 2020 - 15:51
आज़रबाइजान-अर्मीनिया के बीच जारी युद्ध मध्य अचानक तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोग़ान के दामाद ने क्यों दिया इस्तीफ़ा?

तुर्की में राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान के दामाद और इस देश के वित्त मंत्री बेरात अलबायराक ने इस्तीफ़ा दे दिया है। तुर्की की मुद्रा लीरा के मूल्य में रिकॉर्ड गिरावट के बीच उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, तुर्क राष्षट्रपति अर्दोग़ान के दामानद बेरात अलबायराक ने रविवार को जब अपना पद छोड़ा तो इसका आधार स्वास्थ्य कारणों को बताया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा, "लगभग पांच साल तक मंत्री पद पर रहने के बाद, मैंने स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से हटने से फ़ैसला किया है।" उनका कहना है कि वह अपने परिवार के साथ ज़्यादा समय बिताना चाहते हैं जिसकी अब तक वह उनके अनुसार "अनदेखी" कर रहे थे। राजनीति में आने से पहले अलबायराक ने चालिक होल्डिंग कंपनी के लिए काम किया। वह 2007 में इसके सीईओ बने। लेकिन 2015 में उन्होंने अर्दोग़ान की जस्टिस एंड डेवेलपमेंट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और संसद के लिए चुने गए। सरकार बनने पर उन्हें ऊर्जा मंत्री बनाया गया। लेकिन 2018 में उन्हें वित्त मंत्रालय की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। बहुत से विश्लेषकों ने सोचा था कि 42 साल के अलबायराक को अर्दोग़ान का उत्तराधिकारी बनने के लिए तैयार किया जा रहा है।

यह अभी साफ नहीं है कि उनका इस्तीफ़ा स्वीकार किया गया है या नहीं। इस साल की शुरुआत में तुर्की के गृह मंत्री सुलेमान सोएलू ने भी इस्तीफ़ा देने की कोशिश की, लेकिन अर्दोग़ान ने इसे स्वीकार नहीं किया और वह पद पर बने हुए हैं। तुर्की की केंद्रीय बैंक के गवर्नर मुरात उइसाल को बर्ख़ास्त करने के राष्ट्रपति अर्दोग़ान के फ़ैसले के एक दिन बाद अलबायराक ने इस्तीफ़ा दिया है। पूर्व वित्त मंत्री नाची अगबाल को नया गवर्नर नियुक्त किया गया है। कुछ जानकारों का मानना है कि आज़रबाइजान और अर्मीनिया के बीच जारी युद्ध एवं कई अन्य मोर्चों पर युद्ध में कूदने के बाद तुर्की की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है, जिसके कारण तुर्की की राष्ट्रीय मुद्रा लीरा के मूल्य में अभूतपूर्व गिरावट आई है। अर्दोग़ान सरकार में शामिल कई अधिकारियों का कहना है कि तुर्की के राष्ट्रपति के दामाद आज़रबाइजान और अर्मीनिया युद्ध में तुर्की के शामिल होने के अर्दोग़ान के फ़ैसले से ख़ुश नहीं थे।

तुर्की की ख़राब होती अर्थव्यवस्था का ज़िम्मेदार कौन?

तुर्की की अर्थव्यवस्था इस समय ख़राब दौर से गुज़र रही है। जानकार कहते हैं कि ज़्यादा फेरबदल से उसे मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। तुर्की की मुद्रा लीरा शुक्रवार को एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8.48 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। इस देश की सालाना मुद्रास्फीति दर भी 11.8 प्रतिशत है। अलबायराक तुर्की की अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत के लिए अक्सर विदेशी ताक़तों को ज़िम्मेदार ठहराते रहते हैं। अर्दोग़ान की सत्ताधारी एके पार्टी के एक नेता का कहना है कि केंद्रीय बैंक के नए गवर्नर अगबाल के सामने "मुश्किल परीक्षा" है, लेकिन वह एक मज़बूत नाम हैं, जो लीरा पर दबाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। एके पार्टी के नेता ने कहा, "केंद्रीय बैंक की कमान एक मज़बूत गवर्नर के हाथ में होगी। वह समझदारी से काम करेंगे।"

तुर्की के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एरिक मायरसन कहते हैं कि उइसाल ने तुर्की में अर्थव्यवस्था की सारी मुश्किलों की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले ली है, लेकिन ऐसे हालात राष्ट्रपति अर्दोग़ान की वजह से पैदा हुए हैं, क्योंकि उन्होंने देश को कई युद्ध के मोर्चे पर झोंक रखा है और साथ ही "केंद्रीय बैंक के गवर्नर के हाथ बांध रखे हैं और वह कठपुतली से ज़्यादा कुछ नहीं होता।" विपक्षी पार्टियों ने उइसाल को गवर्नर पद से हटाने के फ़ैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे केंद्रीय बैंक पर अर्दोग़ान का असर और मज़बूत होगा और बैंक राजनीति का अखाड़ा बन रहा है। कभी अर्दोग़ान की सरकार में मंत्री रहे और इस समय देवा पार्टी नाम के राजनीतिक दल के प्रमुख अली बाकाबान कहते हैं, "आधी रात को केंद्रीय बैंक के गवर्नर को हटा देना और उसकी जगह किसी और को बैठा देना सिर्फ लचर प्रबंधन को दर्शाता है। आप एक नौकरशाह को हटाकर अपनी ज़िम्मेदारियों से नहीं भाग सकते क्योंकि उसने तो वही किया जो आप उससे करने को कह रहे थे।"