21 सितंबर 2015 - 13:59
 अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब, अपराध और शरारत के त्रिभुज हैं।

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब को दुष्टता व अपराध का त्रिकोण बताया और यमन की ओर उनकी लालची निगाहों के अंजाम की ओर से सचेत किया।

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब को दुष्टता व अपराध का त्रिकोण बताया और यमन की ओर उनकी लालची निगाहों के अंजाम की ओर से सचेत किया।
अलआलम टीवी चैनल के अनुसार, अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता सय्यद अब्दुल मालिक हौसी ने यमन की क्रान्ति की सालगिरह पर कहा, “21 सितम्बर को यमनी राष्ट्र का शुरु होने वाला गंभीर व ज़िम्मेदारी भरा आंदोलन, वैध मांगों के पूरा होने तक जारी रहेगा।” उन्होंने बल दिया कि यमन की मुश्किल, जटिल और बड़ी थी इसलिए इस देश में व्यापक रूप से क्रान्ति आयी।
अब्दुल मालिक हौसी ने कहा कि यमन में सऊदी और पश्चिम की पैठ के कारण क्रान्ति आयी। उन्होंने कहा कि यमन की सरकार विदेशी शक्तियों के हाथ की कठपुतली बन गयी थी इसलिए यमन में राजनीति के अभाव के संबंध में और चुप रहना मुमकिन नहीं था।
अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता ने कहा कि यमन में सरकार का जनता के हितों पर ध्यान नहीं था बल्कि वह अपराध के त्रिकोण अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब के लिए काम कर रही थी। उन्होंने बल दिया कि उस समय यमन में संप्रभुता नहीं थी और विदेशी, यमन में भ्रष्टाचार की बात को मानते हुए भी उसका समर्थन करते थे और यमन की नीति को अमरीका, सऊदी अरब और इस्राईल के हितों के अनुसार बनाया जाता था।
अब्दुल मालिक हौसी ने कहा कि अमरीका, सऊदी अरब और इस्राईल का मुख्य लक्ष्य, यमन पर सैन्य अतिक्रमण था। उन्होंने बल दिया कि सऊदी अरब, अमरीका और इस्राईल, यमन का धीरे धीरे विघटन चाहते थे और अलक़ाएदा की पैठ सहित अनेक बहानों से यमन पर हमला करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि यमन की जनता ने 21 सितंबर को दुश्मन की चाल को नाकाम बना दिया।
यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता ने कहा कि 21 सितंबर की यमन की क्रान्ति ने इस देश को विनाश व अतिग्रहण से बचा लिया। उन्होंने कहा कि यमनी जनता के पास क्रान्ति के अलावा कोई रास्ता न था।
अब्दुल मालिक हौसी ने यमन के कुछ राजनैतिक दलों के विदेशी षड्यंत्रों में संलिप्तता का उल्लेख किया और कहा कि विदेश से मिले गुट, राष्ट्रीय वार्ता और उसके परिणाम के ख़िलाफ़ विद्रोह करना चाहते थे और विदेशी पक्ष ने भी यमनी जनता की क्रान्ति का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यमनी राष्ट्र की स्वाधीनता, सम्मान और वजूद को बचाने के लिए क्रान्ति जारी रहेगी।