सीरिया में इस्राईल, अमरीका, तुर्की, सऊदी अरब और क़तर के खुले हस्तक्षेप और आतंकवादी गुटों के समर्थन से उपजे शरणार्थी संकट के लिए जहां यूरोपीय देशों पर दबाव है, वहीं दुनिया भर में लोगों के दिमाग़ में एक ही सवाल उठ रहा है कि अय्याशी पर अरबों डॉलर उड़ा देने वाले फ़ार्स खाड़ी देशों के धनी शासक क्या कर रहे हैं?
शुक्रवार को मध्यपूर्व और अन्य दूसरे मुस्लिम देशों की जनता ने सोशल मीडिया पर एक अभियान शुरू किया है, जिसमें फ़ार्स खाड़ी देशों के शासकों का ध्यान सीरिया और अन्य संकट ग्रस्त देशों में बेघर हो जाने वाले निर्दोष लोगों की समस्याओं की ओर दिलाया गया है।
ट्वीटर पर #शेम ऑन अरब रूलर्स, ट्वीट बड़ी संख्या में ट्रैंड कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि फ़ार्स खाड़ी के देश क्यों अपने दरवाज़े सीरिया के शरणार्थियों पर बंद किए हुए हैं।
यह ऐसी स्थिति में है कि जब जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने सीमित संख्या में सीरियाई शरणार्थियों के लिए अपने देश की सीमाएं खोले जाने का आदेश देते हुए कहा था कि हम अपनी आने वाली नस्लों को बतायेंगे कि सीरिया और इराक़ से मक्का निकट था, इसके बावजूद वहां के शरणार्थी दूरदराज़ यूरोपीय देशों का रुख़ करने के लिए मजबूर हुए।
सोशल मीडिया पर यह अभियान, सीरिया के उस मासूम छोटे बच्चे की मौत के बाद शुरू हुआ जिसकी लाश तुर्की के बोडरम समुद्र तट पर औंधे मुंह पड़ी हुई मिली थी, और इस बच्चे की मौत ने हर उस इंसान को झकझोर कर रख दिया जिसके सीने में दिल है।
3 वर्षीय आयल कुर्दी नामक यह मासूम बच्चा अपने भाई और मां के साथ उस समय डूबकर मर गया था, जब वे समुद्र द्वारा यूनान पहुंचने का प्रयास कर रहे थे।