21 अगस्त 2015 - 13:07
 ईरान अहलेबैत (अ) की शिक्षाओं के अनुसार तानाशाहों के सामने कभी नहीं झुकेगा।

सुप्रीम लीडर ने इमाम हुसैन का अनुसरण करते हुए अवैध शक्तियों के सामने झुकने से वैसे ही इंकार कर दिया जैसे इमाम हुसैन (अ) ने यज़ीद की बैअत के लिए मना किया था।

अहलेबैत (अ) न्यूज़ एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार विश्व अहलेबैत (अ) परिषद के छठे सम्मेलन में ईरान के उप विदेश मंत्री सैयद अब्बास इराक़ची ने ईरान और ग्रुप 5 + 1  के साथ हुए परमाणु समझौते की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह समझौता सफल हो या न हो वह अपनी जगह है लेकिन खुद विश्व शक्तियों के साथ बातचीत सभी शिया दुनिया के लिए एक महान अनुभव है और वह यह है कि प्रतिरोध के साथ अपने इरादे को मनवाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वार्ता में प्राप्त की गई सफलता केवल बातचीत करने वाली टीम के प्रयासों का परिणाम नहीं बल्कि पूरे ईरानी राष्ट्र की मेहनतों का परिणाम है क्योंकि उन्होंने इतने साल प्रतिबंध और दबाव का मुकाबला किया और प्रतिरोध किया।
ईरान की परमाणु वार्ता टीम के सदस्य ने कहा कि बारह साल पहले ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु प्लांट पर झगड़ा शुरू हुआ और पश्चिमी शक्तियों ने ईरान पर प्रतिबंध लगा कर ईरान को परमाणु ऊर्जा प्राप्त करने से वंचित करने की कोशिश शुरू कर दी।
डॉक्टर इराक़ची ने कहा: पश्चिम का कहना था कि ईरान परमाणु ऊर्जा को प्राप्त नहीं कर सकता और ईरान का कहना था कि परमाणु ऊर्जा प्राप्त करना हमारा अधिकार है तो ईरान और पश्चिमी शक्तियों के बीच इरादों की लड़ाई शुरू हो गई बारह साल लगातार संघर्ष और प्रतिरोध के बाद आखिरकार ईरान ने अपने इरादे के सामने पूरी दुनिया को झुकते हुए देख लिया।
उन्होंने कहा कि ईरान अहलेबैत (अ) की शिक्षाओं की छत्र छाया में तानाशाह हठधर्मों के सामने कभी नहीं झुक सकता।
ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा के यह सोचा कि ईरान घुटने टेकने पर मजबूर हो जाएगा लेकिन ईरान की जनता ने अहले बैत के चरित्र का अनुसरण करते हुए प्रतिरोध किया और सफल हुए।
अब्बास इराक़ची कहा कि सुप्रीम लीडर ने इमाम हुसैन का अनुसरण करते हुए अवैध शक्तियों के सामने झुकने से वैसे ही इंकार कर दिया जैसे इमाम हुसैन (अ) ने यज़ीद की बैअत के लिए मना किया था।
उन्होंने कहा कि दुश्मन ख़ास कर यहूदी राज्य दसियों करोड़ डॉलर खर्च कर रहे हैं कि इस समझौते को विफल बनाएं और इसे कार्यकारी चरण तक न पहुंचने दें और यह बात खुद कारण बनी है कि अमेरिका और यहूदी राज्य के बीच ऐतिहासिक मतभेद अस्तित्व में आए उन्होंने कहा कि अनुबंध कार्यकारी चरण तक पहुंचे या न पहुंचे दुनिया में ईरान की लोकप्रियता में बढ़ोत्तरी हुई है।