नई दिल्ली में ईरान के राजदूत ग़ुलाम रज़ा अंसारी ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए कहा है कि भारत, ईरान का एक विश्वसनीय सहयोगी है।
अंसारी का कहना था कि ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका और पश्चिम के ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने ईरान के साथ अपने आर्थिक एवं राजनीतिक संबंधों को बनाए रखा, इसलिए ईरान और गुट पांच धन एक के बीच परमाणु सहमति बनने और प्रतिबंधों के हटने का लाभ उठाने के लिए भी भारत को आगे रहना चाहिए।
ईरानी राजदूत का कहना था कि महत्वहीन वार्ताओं में समय व्यर्थ करने के बजाए भारत को खनिज तेल से समृद्ध इस देश की बुनियादी परियोजनाओं में आठ अरब डॉलर के निवेश के अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को प्रतिबंध हटने से पहले अगले 3 से 5 माह के समय का लाभ उठाना चहिए, क्योंकि उसके बाद पश्चिमी देश ईरान में अपना निवेश शुरू कर देंगे।
अंसारी का कहना था कि इसी महीने रूस में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के दौरान राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ईरान की रणनीतिक ढांचागत परियोजनाओं में भारत को बड़ी भूमिका देने की पेशकश की थी।
ईरान के राष्ट्रपति ने बंदरगाह, रेल सड़क और राजमार्ग जैसे क्षेत्रों में भारत से आठ अरब डॉलर का निवेश करने को कहा है। उन्होंने कहा, भारत के लोग काफ़ी सकारात्मक हैं। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि यह सब ऐक्शन में बदलना चाहिए और हमें हल्कीफुल्की बातचीत में समय नहीं गंवाना चाहिए। ईरान के राजदूत ने कहा कि ईरान में भारत का निवेश भारतीयों के लिए लाभदायक है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का सम्पर्क सुविधाओं पर अधिक बल है। यह ईरान सरकार की नीति से मेल खाता है। इसीलिए ईरान ने भारत को चाबहार जैसे सामरिक महत्व के बंदरगाहों और सड़क तथा रेलमार्ग परियोजनाओं के निर्माण की परियोजनाएं देने की पेशकाश की है। चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के लिए दोनों देशों के बीच मई में समझौता हो चुका है। भारत के जहाज़रानी मंत्री नितिन गडकरी ने ईरान की अपनी यात्रा के दौरान, 8.5 करोड़ डॉलर की एक सहमति पर हस्ताक्षर किए थे।
उल्लेखनीय है कि चाबहार बंदरगाह द्वारा भारत के लिए न केवल अफ़गानिस्तान बल्कि मध्य एशिया तक पहुंच आसान हो जाएगी। यह क्षेत्र ऊर्जा स्रोतों से भरा पड़ा है जो भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में काफ़ी अहम साबित हो सकता है।