ज़ायोनी शासन ने स्वीकार किया है कि इस्राईल की हर सैन्य कार्यवाही अमरीका की अनुमति से होती है।
इस्राईल की पूर्व विदेशमंत्री ने कहा कि अमरीका से पूर्व सहमति के बाद ही कोई सैन्य कार्यवाही की जाती है। ज़िपी लिवनी ने इस्राईल की संसद में इस्राईल-अमरीका गुट की बैठक में कहा कि इस्राईल की ओर से किसी भी प्रकार की सैन्य कार्यवाही से पूर्व अमरीका से अनुमति लेना आवश्यक है।
इस्राईल की पूर्व विदेशमंत्री ने नेतनयाहू की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनकी नीतियां, तेलअवीव के कमज़ोर पड़ने का कारण बनी हैं। लिवनी ने कहा कि यदि हमें अमरीका का समर्थन प्राप्त नहीं होता तो इस्राईल इससे भी अधिक कमज़ोर हो जाता।
उन्होंने अमरीका द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस्राईल के समर्थन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अमरीका यदि इस्राईल का समर्थन करना छोड़ दे तो वह बिल्कुल अलग-थलग पड़ जाएगा। ज़ायोनी शासन की पूर्व विदेशमंत्री ने कहा कि विश्व की कोई भी सरकार इस्राईल के साथ सहकारिता करने के लिए तैयार नहीं है।
इसी बीच अमरीकी कांग्रेस के शोध विभाग ने घोषणा की है कि वह ज़ायोनी शासन को अबतक 120 अरब डालर से भी अधिक की सहायता कर चुका है। इस घोषणा के अनुसार अमरीका ने 120 अरब डालर में से 70 अरब डालर की इस्राईल को सैन्य सहायता की है।