अदन की खाड़ी में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गयी जब अचानक अमरीका के दो युद्धपोत, P3C और DDG81 ने ईरान के अलबुर्ज़ 72 नामक युद्धपोत से निकट होने का प्रयास किया।
यमन संकट के कारण अदन की खाड़ी में कई देशों के युद्धपोत मौजूद हैं और इस दौरान सोमवार को दो अमरीकी युद्धपोतों ने ईरानी युद्धपोतों से पांच मील की कानूनी दूरी को कम करना आरंभ कर दिया जिसके बाद ईरान के अलबुर्ज़ 72 ने दोनों अमरीक युद्धपोतों को कड़ी चेतावनी दी जिसके बाद अमरीकी युद्धपोत, वहां से तेज़ी के साथ दूर हो गये। इस्लामी गणतंत्र ईरान की नौसेना के 34वें बेड़े के कमांडर ने बताया है कि अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में विदेशी युद्धपोतों और ईरान के राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा समझी जाने वाली हर चीज़ की तलाशी हमारा कर्तव्य है।कैप्टन मुस्तफा ताजुद्दीनी ने यमन में सऊदी अरब के अपराधों की ओर संकेत करते हुए अदन की खाड़ी में विदेशी युद्धपोतों की उपस्थिति का कारण सऊदी अरब की सहायता बताया और कहा कि यमन में अपराध के लिए सऊदी अरब के साथ सहयोग हेतु अरब व पश्चिमी शक्तियों ने गठजोड़ बनाया है और उनके लिए इस खाड़ी में हमारी उपस्थिति असहनीय है। ईरान के युद्धपोत अलबुर्ज़ 72 के कैप्टन ने बताया कि अदन की खाड़ी में अमरीकी युद्धपोत और युद्धक विमान जब ईरानी युद्धपोत से निकट हुए तो तत्काल उन्हें चेतावनी दी गयी कि वह पांच मील की कानूनी दूरी कम कर रहे हैं जिसका अमरीकी युद्धपोत ने तत्काल जवाब देते हुए, ईरानी युद्धपोत से पांच मील की दूरी बना ली। ईरान का 34वां बेड़ा, 25 दिनों से अदन की खाड़ी में तैनात है और उसके इस मिशन का उद्देश्य , ईरान के राष्ट्रीय हितो की रक्षा बताया गया है।