एक साल से भी अधिक समय से क़त्ले आम कर रही ज़ायोनी सेना को ग़ज़्ज़ा और लेबनान में दरिंदगी और बर्बरता के तमाम रिकॉर्ड तोड़ने के बाद भी कुछ हासिल नहीं हुआ वह अपने एक बंधक को भी प्रतिरोध दल की क़ैद से नहीं निकाल सका।
ज़ायोनी शासन की हताशा और निराशा के बड़ा अब अवैध राष्ट्र के सत्ताधारियों के बीच में ही हमास की शर्तों पर युद्ध विराम की मांग उठने लगी है।
ज़ायोनी नेताओं का मानना है कि सेना अपनी पूरी क्षमता काप्रयोग कर चुकी है और बंधकों को मुक्ति नहीं मिल सके अब केवल कूटनीति से ही उनकी रिहाई संभव है। जबकि अपनी सत्ता बचाने और अदालत की कार्रवाई से बचने के लिए नेतन्याहू पूर्ण युद्ध विराम के लिए तैयार नहीं है और अभी तक के प्रस्तावों में ऐसी शर्तें लगा रहे है, जिनकी वजह से मध्यस्थों के लिए शांति प्रस्ताव पर अमल कराना और मुश्किल हो गया है। नेतन्याहू सेना पर दबाव बना रहे है कि सैन्य ऑपरेशन के जरिए बंधकों की रिहाई कराई जाए, जबकि पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट कह चुके हैं कि ग़ज़्ज़ा में सेना अपनी उच्चतम कार्रवाई पूरी कर चुकी अब बंधकों की रिहाई कूटनीतिक चैनल से ही हो सकती है।