मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना सय्यद कल्बे जवाद नक़वी ने ग़ज़्ज़ा और लेबनान पर ज़ायोनी सेना के लगातार आक्रामक हमलों की निंदा करते हुए इन हमलों को आतंकवादी गतिविधि बताया। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शक्तियां ग़ज़्ज़ा के बाद अब लेबनान को भी तबाह करने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से ज़ायोनी सेना खतरनाक और प्रतिबंधित हथियारों से निर्दोष नागरिकों और आवासीय भवनों को निशाना बना रही है, इसको आतंकवाद नहीं तो और क्या कहा जाएगा। दुनिया की आंखों के सामने निर्दोषों का कत्लेआम किया जा रहा है और सभी मूक दर्शक बने हुए हैं, यह निंदनीय है।
मौलाना ने अपने बयान में कहा कि इस्राईल की जंग हिज़्बुल्लाह से है, लेकिन वह मासूम नागरिकों को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह ने कभी भी निर्दोष नागरिकों की हत्या नहीं की लेकिन अवैध राष्ट्र ने क्रूरता और आतंक की सभी हदें पार कर दी हैं।
मौलाना ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनो को जितना बेबस ग़ज़्ज़ा और लेबनान पर हमलों के दौरान देखा गया है, अतीत में इसकी मिसाल नहीं मिलती। अगर यह अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ शांति और युद्ध को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा सकतीं तो इन संस्थाओं के होने का क्या फ़ायदा? मौलाना ने कहा कि हाल ही में हुई संयुक्त राष्ट्र की बैठक में निंदा प्रस्ताव के अलावा कोई अहम फैसला नहीं लिया गया जिससे ये साबित होता है कि ये संस्थाएँ अपना प्रभाव खो चुकी हैं।