قـالَ الصّـادِقُ عليه السلام:
ما كَلَّمَ رَسُولُ اللّهِ صلي الله عليه و آله الْعِبادَ بِكُنْهِ عَقْلِهِ قَطُّ، قـالَ رسُـولُ اللّهِ صلي الله عليه و آله: اِنّا مَعـاشِرَ الاَْنْبِـياءِ اُمِرْنا اَنْ نُكَلّـِمَ النّاسَ عَلى قَدْرِ عُقُولِهِمْ.
[سُنَنُ النَّبى،ص 57]
हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं:
पैग़म्बरे इस्लाम ने कभी भी अपनी अक़्ल के हिसाब से लोगों से बात नहीं की और वह फ़रमाते थे कि हम अंबिया ए इलाही को यह ज़िम्मेदारी दी गयी है कि वे लोगों से उनकी अक़्ल और समझ के हिसाब से ही बात करें।