22 जून 2024 - 05:09
 हाजी मरें या जियें आले सऊद को तो कमाई से मतलब

इस साल भी बड़ी संख्या में हाजियों ने कुप्रबंधन की शिकायत की है। शिकायत में शिविरों में साफ-सफाई की कमी, अपर्याप्त भोजन और मिना में टेंट सिटी में भीड़भाड़ शामिल है। तेलंगाना के एक तीर्थयात्री ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि हमारे साथ भिखारियों से भी बदतर व्यवहार किया गया।

आले सऊद को तो बस काबे और हज से होने वाली अरबों-खरबों की कमाई से मतलब है और फिर उसी कमाई को अय्याशी और सीरिया, लीबिया, सूडान, इराक और यमन जैसे देशों के मुसलमानों के क़त्ले आम के लिए इस्तेमाल करना है।

यह पहला मौक़ा नहीं जब मक्का में हज़ारों मुसलमान हज के दौरान मौत का निवाला बने हों पहले भी कई बार हज़ारों हाजी आले सऊद के कुप्रबंधन और लापरवाही के कारण बेमौत मारे गए हैं।

इस साल भी बड़ी संख्या में हाजियों ने कुप्रबंधन की शिकायत की है। शिकायत में शिविरों में साफ-सफाई की कमी, अपर्याप्त भोजन और मिना में टेंट सिटी में भीड़भाड़ शामिल है। तेलंगाना के एक तीर्थयात्री ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि हमारे साथ भिखारियों से भी बदतर व्यवहार किया गया।

ऐसी रिपोर्ट भी हैं कि इस गर्मी में जब मक्का का टेंप्रेचर 51 डिग्री से भी अधिक है जिस तंबू 80 से 100 तीर्थयात्रियों को रहना था, उसमें 200 तक हाजियों को रखा गया है।

हम यहाँ पिछले कुछ वर्षों में आले सऊद के कुप्रबंधन के कारण हुई घटनाओं में मारे जाने वाले ज़ाएरीन और घटनाओं का उल्लेख कर रहे हैं।

* दिसंबर 1975: एक गैस सिलेंडर ब्लास्ट हुआ था जिसमें करीब 200 हज यात्रियों की मौत हुई थी।

* 2 जुलाई 1990: पैदल चलने के लिए बनी एक टनल में 1,426 लोगों की मौत हो गई थी। यह हज के इतिहास में दर्ज सबसे बड़ा हादसा है।

* 23 मई 1994: "रमीये जमरात" शैतान को पत्थर मारने के दौरान 270 लोगों की मौत हुई।

* 15 अप्रैल 1997: टेंट में आग लगने से करीब 343 हज यात्रियों की मौत हुई थी जबकि 1500 लोग इस दुर्घटना में घायल हो गए थे। इसके बाद से टेंट फायरप्रूफ बनाए जाने लगे।

* 9 अप्रैल 1998: जमारात ब्रिज पर भगदड़, 118 की मौत।

* 5 मार्च 2001: शैतान को पत्थर मारने के रस्म के दौरान 35 लोगों की मौत।

* 11 फरवरी 2003: शैतान को पत्थर मारने के दौरान 14 हाजियों की मौत।

* 1 फरवरी 2004: शैतान को पत्थर मारने के दौरान भगदड़, 251 लोगों की मौत।

* 5 जनवरी 2006: अल-ग़ज़्ज़ा होटल की बहुमंजिला इमारत मस्जिदुल हराम पर गिर गई। 2006 में हाजियों की एक बड़ी तादाद इस होटल में ठहरी थी। अभी तक इसका पता नहीं चल सका है कि उस समय होटल में कितने हज यात्री ठहरे हुए थे। इस घटना में 76 लोगों के मारे जाने और 64 लोगों के घायल होने की खबर दी गयी थी।

* 12 जनवरी 2006: शैतान को पत्थर मारने के दौरान फिर भगदड़, 360 लोगों की मौत।

* दिसंबर 2006: हज यात्रियों को मदीना से मक्का ले जाने वाला कोच दुर्घटनाग्रस्त, 3 लोग मरे जबकि करीब 34 लोग घायल हुए। बच्चे भी शामिल।

* नवंबर 2011: कोच में आग लगने से पति-पत्नी की मौत।

* 11 सितंबर 2015: मक्का की मस्जिदुल हराम में एक बड़ी क्रेन के गिर जाने से कम से कम 107 लोगों की मौत, 238 लोग घायल हुए।

* 24 सितंबर, 2015 को मैदाने मिना में कुप्रबंधन के नतीजे में दर्दनाक दुर्घटना, 717 हाजियों की मौत। इस घटना से कुछ दिन पहले ही सितंबर महीने में ही, मस्जिदुल हराम में क्रेन गिरने से 107 लोगों की मौत हुई थी।