28 मई 2024 - 09:40
जन्नत का रास्ता

अल्लाह तआला की ज़िम्मेदारी है कि वह उसे क़यामत के दिन के खौफ और डर से महफूज़ रखे और उसे जन्नत में दाख़िल करे।


قالَ الاِمامُ الصّادِقُ عليه السلام:

 مَنْ تَوَلّى أمْراً مِن اُمُورِالنّاسِ فَعَدَلَ وَ فَتَحَ بابَهُ وَ رَفَعَ شَرَّهُ وَ َنَظَرَ فى اُمُورِ النّاسِ كانَ حَقّاً عَلَى اللّه ِ عَزَّوَجَلَّ أَن يُؤَمِّنَ رَوْعَتَهُ يَومَ القِيامَةِ وَ يُدْخِلَهُ الجَنَّةَ.

 [ميزان الحكمه ح 2773 ص 7122 , نقل از بحار ج 75 ص 340]

हज़रत इमाम जाफ़र सादिक अलैहिस्सलाम : जो कोई लोगों के मामलों की ज़िम्मेदारी अपने हाथ में ले लेता है, अद्लो इंसाफ करता है, लोगों के लिए अपने घर के दरवाज़े खुले रखता है, किसी को नुक़सान नहीं पहुंचाता और लोगों की समस्याओं को दूर करता है, अल्लाह तआला की ज़िम्मेदारी है कि वह उसे क़यामत के दिन के खौफ और डर से महफूज़ रखे और उसे जन्नत में दाख़िल करे।