1 अप्रैल 2024 - 23:04
बाईसवीं रमज़ान की दुआ

मुझ पर अपनी बरकतें नाज़िल फ़रमा और मुझे तेरी मर्ज़ी हासिल करने के रास्तों को समझने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा


اَللّهُمَّ افْتَحْ لِی فِیهِ أَبْوَابَ فَضْلِک وَ أَنْزِلْ عَلَی فِیهِ بَرَکاتِک وَ وَفِّقْنِی فِیهِ لِمُوجِبَاتِ مَرْضَاتِک وَ أَسْکنِّی فِیهِ بُحْبُوحَاتِ جَنَّاتِک یا مُجِیبَ دَعْوَةِ الْمُضْطَرِّینَ

ख़ुदाया आज के दिन मेरे लिए अपने करम के दरवाज़े खोल दे और मुझ पर अपनी बरकतें नाज़िल फ़रमा और मुझे तेरी मर्ज़ी हासिल करने के रास्तों को समझने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा और जन्नत में मरकज़ी जगह इनायत कर, ऐ बेचैन लोगों की दुआएं क़ुबूल करने वाले।