28 मार्च 2024 - 23:59
अठ्ठारहवीं रमज़ान की दुआ

मेरे जिस्म के हर हिस्से को अपने अहकाम पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे अपने नूर के वसीले से ऐ आरिफ़ों के दिलों को रौशन करने वाले।


اَللّهُمَّ نَبِّهْنِی فِیهِ لِبَرَکاتِ أَسْحَارِهِ وَ نَوِّرْ فِیهِ قَلْبِی بِضِیاءِ أَنْوَارِهِ وَ خُذْ بِکلِّ أَعْضَائِی إِلَی اتِّبَاعِ آثَارِهِ بِنُورِک یا مُنَوِّرَ قُلُوبِ الْعَارِفِینَ

ख़ुदाया आज के दिन मुझे इस महीने की सहरियों की बरकत से आगाह कर दे और मेरे दिल को उसकी रौशनियों से चमका दे और मेरे जिस्म के हर हिस्से को अपने अहकाम पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे अपने नूर के वसीले से ऐ आरिफ़ों के दिलों को रौशन करने वाले।