اَللّهُمَّ وَفِّقْنِی فِیهِ لِمُوَافَقَةِ الْأَبْرَارِ وَ جَنِّبْنِی فِیهِ مُرَافَقَةَ الْأَشْرَارِ وَ آوِنِی فِیهِ بِرَحْمَتِک إِلَی [فِی]دار الْقَرَارِ بِإِلَهِیتِک یا إِلَهَ الْعَالَمِینَ
ख़ुदाया आज के दिन मुझे नेक लोगों के साथ उठने बैठने की तौफ़ीक़ अता कर और बुरे लोगों से बचाए रख और मुझे अपनी रहमत के सदक़े में दारुल क़रार में जगह अता फ़रमा, अपनी उबूदियत के वसीले से ऐ आलमीन के माबूद।