इसलिए तुम लोग अपने दिलों को बुरी बातों से पाक कर के अच्छी नीयत से सजा कर अल्लाह की बारगाह में दुआ करो कि वह तुम को इस महीने में रोज़ा रखने और क़ुर्आन की तिलावत करने की तौफ़ीक़ दे, क्योंकि जो इस महीने अल्लाह की मग़फ़ेरत से महरूम रह गया उसका अंजाम ख़तरनाक और बहुत बुरा होगा, इस महीने में जब भूख प्यास लगे तो क़यामत की भूख और प्यास का ख़्याल करो, फ़क़ीरों और मिसकीनों को सदक़ा दो, बड़ों की इज़्ज़त करो और छोटों पर रहम करो और रिश्तेदारों से अच्छा बर्ताव करो, अपनी ज़बान को ऐसी बातों से बचाओ जिनका बोलना और कहना हराम है और आंखों को उन चीज़ों से बचाओ जिनका देखना हराम है और कानों से उन बातों को मत सुनो जिनका सुनना सही नही है, यतीमों पर रहम करो ताकि कल तुम्हारे मरने के बाद लोग तुम्हारे यतीम बच्चों पर रहम करें, अपने गुनाहों से तौबा करो और सारा ध्यान अल्लाह की बारगाह में लगाओ, नमाज़ के बाद अपने हाथों को उठा कर दुआ करो क्योंकि इस समय अल्लाह अपने बंदों को रहमत की निगाह से देखता है और जो बंदे उस समय उससे मुनाजात करते हैं उन सबका वह जवाब देता है और जो भी उस समय पुकारता है उसकी पुकार को वह सुनता है।
ऐ लोगों इसमें शक नहीं है कि तुम्हारी जानें गिरवीं हैं इसलिए अल्लाह से मग़फ़ेरत मांग कर उन्हें छुड़ाने की कोशिश करो, तुम्हारी कमर गुनाहों के बोझ से झुकी हुई हैं तुम ज़्यादा से ज़्यादा सजदे कर के उनका बोझ हलका करो क्योंकि अल्लाह ने अपनी इज़्ज़त और अज़मत की कसम खा कर कहा है कि वह इस महीने नमाज़ पढ़ने वाले और सजदे करने वालों पर अज़ाब नाज़िल न करे और क़यामत में उनको जहन्नम का ख़ौफ़ न दिलाए।
ऐ लोगों जो भी इस महीने किसी मोमिन के इफ़तार का बंदोबस्त करेगा तो अल्लाह उसके गुनाह को माफ़ कर देगा और उसे एक ग़ुलाम आज़ाद करने का सवाब देगा, पैग़म्बर स.अ. के कुछ सहाबियों ने पूछा या रसूलल्लाह (स.अ.) हम में से कुछ लोग इस अमल पर क़ादिर नहीं हैं तो आपने फ़रमाया, तुम इफ़तार में आधी खजूर खिला कर या एक घूंट शर्बत पिला कर भी ख़ुद को जहन्नम की आग से बचा सकते हो, क्योंकि अल्लाह उसको भी वही सवाब और अज्र देगा जो इससे ज़्यादा इफ़तार देने पर क़ादिर नहीं होगा।
ऐ लोगों जो शख़्स इस महीने अपने अख़लाक़ को सुधारेगा अल्लाह क़यामत में उसे पुले सेरात से जहां सबके पैर फिसल रहे होंगे उसे आसानी से गुज़ार देगा, और जो शख़्स इस महीने अपने ग़ुलाम और कनीज़ पर काम का बोझ कम डालेगा अल्लाह क़यामत के दिन उसके हिसाब किताब को आसान कर देगा, और जो यतीमों को प्यार, इज़्ज़त और सम्मान देगा उसे क़यामत में अल्लाह सम्मान देगा, जो अपने रिश्तेदारों से अच्छा बर्ताव करेगा अल्लाह उस पर क़यामत में अपनी रहमत जारी रखेगा और जो उनसे बद सुलूकी करेगा अल्लाह उसे अपनी रहमत से महरूम कर देगा, जो इस महीने मुस्तहब नमाज़ें पढ़ेगा अल्लाह उसे जहन्नम से आज़ादी अता करेगा और जो वाजिब नमाज़ें अदा करेगा उसके आमाल का वज़न भारी कर देगा जबकि उस समय लोगों के आमाल का पलड़ा हलका होगा, जो इस महीने क़ुर्आन की एक आयात की तिलावत करेगा अल्लाह दूसरे महीनों में पढ़े जाने वाले पूरे क़ुर्आन का सवाब देगा।
ऐ लोगों बेशक इम महीने में जन्नत के दरवाज़े खुले हुए हैं इसलिए अल्लाह से दुआ करो कि वह उन्हें तुम पर बंद न करे और जहन्नम के दरवाज़े बंद हैं इसलिए अल्लाह से दुआ करो कि वह उन्हें फिर कभी तुम पर न खोले और शैतानों को इस महीने क़ैद कर दिया जाता है इसलिए तुम अल्लाह से दुआ करो कि वह फिर तुम्हारे ऊपर हावी न होने दे।