इस्राईल द्वारा ग़ज़्ज़ापर की गई बर्बर बमबारी के दौरान जहां पश्चिमी देश पूरी बेशर्मी के साथ इस्राईल के साथ हैं, वहीं मुस्लिम देशों के शासक खुलकर इस्राईल की निंदा कर रहे हैं और न ही उससे अपने राजनयिक रिश्ते खत्म कर रहे हैं।
लेकिन कुछ लैटिन अमेरिकी देशों ने साहसिक कदम उठाया है और मक़बूज़ा फ़िलिस्तीन से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया है।
एबीसी न्यूज ने बोलीविया सरकार के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि ग़ज़्ज़ा में फिलिस्तीनी शहीदों की बढ़ती तादाद और फिलिस्तीन पर ज़ायोनी हमलों और युद्ध के बढ़ने के कारण, बोलीविया ने मक़बूज़ा फिलिस्तीन से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है।
बोलीविया के उप विदेश मंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बोलिविया ने ग़ज़्ज़ा पट्टी में ज़ायोनी सरकार की अनुचित सैन्य आक्रामकता के विरोध करते हुए इसकी निंदा की और ज़ायोनी सरकार के साथ राजनयिक संबंध तोड़ने का फैसला किया है।
बोलीविया के एक अधिकारी ने कहा कि ज़ायोनी शासन ने ग़ज़्ज़ा पट्टी और फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ अत्याचार कर मानवता के खिलाफ अपराध किए हैं, जिन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने ज़ायोनी सरकार के हमलों की निंदा की और कहा: वे ग़ज़्ज़ा में फ़िलिस्तीनी लोगों को सामूहिक सज़ा दे रहे हैं।
चिली और कोलंबिया की तरह, बोलीविया ने भी ज़ायोनी शासन के खिलाफ हमास के अल-अक्सा ऑपरेशन का कोई उल्लेख नहीं किया।
बोलीविया की कार्रवाई के बाद चिली के विदेश मंत्रालय ने भी कहा: ग़ज़्ज़ा पट्टी में इस्राईल द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अस्वीकार्य उल्लंघन के बाद चिली ने अपने राजदूत को वापस बुलाने का फैसला किया है।
कोलंबिया के राष्ट्रपति ने भी घोषणा की कि उन्होंने मक़बूज़ा फ़िलिस्तीन से अपने देश के राजदूत को बुलाया है। उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर लिखा, अगर इस्राईल फिलिस्तीनियों का नरसंहार नहीं रोकता तो हम वहां नहीं रह सकते।
बता दें कि साल 2009 में भी फिलिस्तीन पर इस्राईली आक्रामकता का विरोध करते हुए बोलीविया ने इस्राईल के साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ दिए थे।