यूनिसेफ के अनुसार, ग़ज़्ज़ा में इस्राईल के बर्बर बमबारी के नतीजे में प्रतिदिन 420 से अधिक बच्चे मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं।
यही नहीं इस्राईल के अपराधों को दुनिया के सामने लाने वाले पत्रकार भी ज़ायोनी हमलों का निशाना बना रहे हैं इस सिलसिले में पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संगठन कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स ने कहा है कि इस्राईल-हमास संघर्ष में 31 पत्रकार मारे गए हैं।
सीपीजे का कहना है कि ग़ज़्ज़ा युद्ध में कम से कम 9 पत्रकार लापता हैं या हिरासत में हैं। ग़ज़्ज़ा में पत्रकारों को इस्राईली बमबारी और जमीनी हमले के कारण गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
बता दें कि 7 अक्टूबर के बाद से शहीद फिलिस्तीनियों की संख्या 8,400 तक पहुंच गई है, जबकि 23,000 से ज्यादा घायल हैं। शहीदों में 73 फीसदी बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हैं।