यमन की सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के सदस्य मुहम्मद अली अल-हौसी ने प्रतिरोधी आंदोलनों और ईरान को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दी गई धमकियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हमें संयुक्त राज्य अमेरिका की धमकियों की परवाह नहीं है।
मोहम्मद अली अल-हौसी ने कहा कि यमनी प्रतिरोध ताकतें इलाक़े के अन्य प्रतिरोध संगठनों के साथ एकजुट हैं।
यमन की सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के सदस्य ने कहा कि कोई भी अरब देश इस्राईल के खिलाफ युद्ध में नहीं उतरा फिर भी प्रतिरोध में शामिल हमारी जनता को किसी बात की चिंता नहीं करनी चाहिए, मुजाहिदीन के साथ रहना एक बड़ी नेमत और शरफ है।
अल-हौसी ने जोर देकर कहा कि यमन को अमेरिकी धमकियों की परवाह नहीं है। क्योंकि जिन हथियारों से यमन पर बमबारी हुई वो अमेरिकी थे। हमारे देश के खिलाफ युद्ध की कमान अमेरिका के हाथ में रही, ऑपरेशन रूम में अमेरिकी अधिकारी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि 22 अक्टूबर को यमन के प्रधानमंत्री ने ग़ज़्ज़ा के खिलाफ ज़ायोनी अपराधों को रोकने की अपील की थी और कहा था कि अगर ज़ायोनी अपराध नहीं रुके तो हम लाल सागर में इस्राईली जहाज़ों को निशाना बनाएंगे। उन्होंने कहा अगर ग़ज़्ज़ा पर हमला जारी रहा तो जवाब में लाल सागर में ज़ायोनी सरकार के जहाजों पर हमला किया जाएगा।