सऊदी अरब के साथ रिश्ते सामान्य करने की तमाम कोशिशों के बावजूद भी संतोषजनक परिणाम हासिल करने में नाकाम रहे इस्राईल ने रियाज़ और तेहरान के बीच गहराते रिश्तों पर चिंता जताई और कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण अमेरिका का दिन-ब-दिन कमज़ोर होना है।
इस्राईल के एक अहम समाचार पत्र में ईरान और सऊदी अरब के बीच मजबूत होते रिश्तों पर रिपोर्ट दी गई है जिसमे कहा गया है कि सऊदी अरब का अमेरिका पर भरोसा कम होना इसका एक मुख्य कारण है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने सऊदी अरब की रक्षा करने की अपनी क्षमता खो दी है।
इस्राईल डिफ़ेंस बेस ने सऊदी अरब और ईरान के बीच संबंधों के विस्तार के संबंध में एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में कहा है कि सउदी क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए अमेरिका की क्षमताओं पर भरोसा नहीं करता।
इस रिपोर्ट में ईरान और सऊदी अरब के बीच वर्षों की दुश्मनी के बाद उच्च स्तरीय वार्ता को संपन्न करने के लिए हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान की हालिया सऊदी अरब यात्रा की ओर इशारा किया गया।
इस संबंध में कहा गया है कि बिन सलमान को ईरान का दौरा करने का निमंत्रण मिला, जबकि सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने घोषणा की कि ईरान के साथ उनके देश के संबंध सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
ज़ायोनी संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब संयुक्त राज्य अमेरिका को क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए सक्षम नहीं मानता इसलिए वह चीन के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सप्ताह के अंत में सऊदी विदेश मंत्री ने अपने अमेरिकी समकक्ष से मध्य पूर्व की सुरक्षा और स्थिरता के बारे में बात की।
जबकि दूसरी तरफ सप्ताह के अंत में ही , रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति रईसी के बीच फोन पर बातचीत हुई। यह वार्ता ईरान के ब्रिक्स समूह में शामिल होने की तैयारी के लिए की गई थी, जो दुनिया के राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र के सबसे सक्रिय समूहों में से एक है। ۔