पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से हो रही लगातार आतंकी घटनाओं के बाद पाकिस्तानी सेना पर दबाव बढ़ गया है।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान में जनाक्रोश बढ़ता ही जा रहा है और इस आतंकी संगठन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इस देश में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हमले जारी रहे, तो इस्लामाबाद अफगानिस्तान में इस समूह के ठिकानों और सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है।
हाल के हफ्तों में पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों में वृद्धि से इस्लामाबाद और काबुल के बीच तनाव बढ़ गया है।
पिछले हफ्तों में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में लगभग हर दिन पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ आतंकवादी और आत्मघाती हमले हुए हैं।
14 जुलाई को बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सेना के बैरक पर हुए हमले के बाद भी अफगानिस्तान में तालिबान की अंतरिम सरकार के प्रति पाकिस्तानी अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।
सरकार और पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान को अफगानिस्तान में स्वतंत्रता को दोहा समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए कडी आलोचना की थी।