मुस्लिम देशों से इस्राईल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील करने वाला तुर्की और इस अवैध राष्ट्र को ‘सबक सिखाने की कसम’ खाने वाले अर्दोगान खुद उससे रिश्ते सुधारने के लिए गुहार लगा रहे हैं।
इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 28 जुलाई को तुर्की दौरे पर होंगे। 2008 के बाद ऐसा पहली बार है जब कोई इस्राईली नेता तुर्की जा रहा है। 15 साल पहले प्रधानमंत्री रहे एहुद ओलमर्ट तुर्की गए थे। तुर्की और इस्राईल के बीच पिछले कुछ सालों में संबंधों में तेज़ी से सुधार हुआ है।
अर्दोगान सत्ता में आए तो उनका प्रमुख एजेंडा था तुर्की को ओटोमन युग में वापस ले जाना। वह मुस्लिम देशों में अपना प्रभुत्व कायम करना चाहते थे। उनकी कोशिश थी कि अरब देशों में उनकी धाक हो। हालांकि, अब्राहम समझौते के तहत जॉर्डन, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इस्राईल के साथ अनौपचारिक संबंध स्थापित कर लिए। सऊदी अरब भी फिलिस्तीन पर जुल्म ढाने वाले इस्राईल से रिश्ते ठीक करने की कोशिश में है।
अर्दोगान को डर था कि अरब देशों में वह पीछे रह जाएंगे। यह भी वजह रही कि वह इस्राईल के प्रति नरम हो गए।