प्राप्त समाचारों के अनुसार बुधवार की सुबह राष्ट्रपति के निकारागुआ पहुंचने पर इस देश के राष्ट्रपति ने उनका भव्य स्वागत किया और ईरान और निकारागुआ की क्रांति के एक ही समय में सफल होने और दोनों देशों की क्रांतियों के अपने- अपने राष्ट्रीय नायकों से प्रभावित होने को याद किया गया और उनकी सराहना की गयी।
राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका प्रतिबंध लगाकर ईरानी राष्ट्र को आगे बढ़ने से रोकना चाहता है परंतु ईरानी राष्ट्र ने चुनौतियों व प्रतिबंधों को प्रगति के अवसर में बदल दिया है। राष्ट्रपति ने स्वाधीनता, आज़ादी और न्याय प्रेम को ईरानी और निकारागुआ की जनक्रांतियों का संयुक्त बिन्दु बताया और कहा कि ईरान निकारागुआ के साथ समस्त विशेषकर विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में संबंधों को विस्तृत करने और प्रगाढ़ बनाने के लिए तैयार है।
राष्ट्रपति ने डेमोक्रेसी और मानवाधिकार के संबंध में पश्चिम के दावे को झूठ बताया और कहा कि पश्चिम विशेषकर अमेरिका को चाहिये कि वे लोगों के मतों से अस्तित्व में आने वाली व्यवस्था का सम्मान करें पंरतु वे इसका उल्टा अमल करते हैं। राष्ट्रपति ने आतंकवादी गुट दाइश को बनाने में अमेरिका की भूमिका और आतंकवाद से मुकाबले में इस्लामी गणतंत्र ईरान की नीति की ओर संकेत किया और कहा अमेरिकी आतंकवाद से मुकाबले का दावा करते हैं किन्तु उन्होंने आतंकवाद से मुकाबले के महानायक यानी जनरल कासिम सुलैमानी को शहीद कर दिया।
निकारागुआ के राष्ट्रपति ने भी स्वागत समारोह में कहा कि साम्राज्य विशेषकर अमेरिका से मुकाबले में दोनों देशों की क्रांतियों की जड़ें बहुत गहरी व मज़बूत हैं और अमेरिका और वर्चस्ववादी हमेशा अपने दृष्टिकोणों को दूसरों पर थोपने की चेष्टा में रहते हैं।
निकारागुआ के राष्ट्रपति ने इसी प्रकार दोनों देशों के राष्ट्रीय नायकों की प्रशंसा की और अमेरिका द्वारा आतंकवाद से मुकाबले के महानायक जनरल क़ासिम सुलैमानी को शहीद किये जाने की भर्त्सना की और उनके सम्मान में एक मिनट तक मौन रखने का एलान किया और ईरान ज़िन्दाबाद, शहीद जनरल कासिम ज़िन्दाबाद के नारों के साथ अपने भाषण को समाप्त किया। MM
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