आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इस मौक़े पर अपने संबोधन में हज की अहमियत बयान करते हुए कहा कि पूरी तारीख़ में, हर ज़माने में, जब तक यह दुनिया क़ायम है, यह इब्राहीमी दावत भी मौजूद है। दावत दी गई है एक ख़ास मक़सद के लिए। वह मक़सद क्या है? इस्लामी उम्मत की बुलंदी है।
इस्लामी क्रांति के नेता ने आगे कहा कि हज का मक़सद इस्लामी उम्मत के लोगों के दिलों को एक दूसरे के क़रीब लाना है। मक़सद इस्लामी उम्मत का इत्तेहाद है।
आयतुल्लाह ख़ामेनेई का कहना था कि इस्लामी जगत का की एकता कुफ़्र के मुक़ाबले में, ज़ुल्म के मुक़ाबले में, इम्पेरियलिस्ट ताक़तों के मुक़ाबले में, इंसानी व ग़ैर इंसानी बुतों के मुक़ाबले में है। उन्होंने कहा कि यह एकता उन तमाम चीज़ों के मुक़ाबले में है जिन्हें ख़त्म करने के लिए इस्लाम आया।
342/