14 मई 2023 - 09:11
पाबंदियों के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय क्लाब बनाने का ईरान का आइडिया, रूस ने कहा हम भरपूर हिमायत करेंगे

रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप प्रमुख दिमित्री मेदवेदेव ने सेन पीटर्ज़बर्ग की अंतर्राष्ट्रीय लीगल जनरल असेंबली में पाबंदियों के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय लीगल क्लब बनाने के ईरान के प्रस्ताव का खुलकर स्वागत किया और कहा कि ग़ैर क़ानूनी पाबंदियों का ज़रूर मुक़ाबला किया जाना चाहिए।

मेदवीदेव ने कहा कि हम आपस में मिलकर एकतरफ़ा पाबंदियों का मुक़ाबला करें, मैं ईरान के क़ानून मंत्री के इस प्रस्ताव से पूरी तरह सहमत हूं।

मेदवीदेव का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के अलावा जो भी प्रतिबंध लगाए जाएं वो ग़ैर क़ानूनी हैं और रूस, ईरान तथा दूसरे बहुत से देश पश्चिम की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को मान्यता देने के लिए तैयार नहीं हैं।

इस्लामी गणराज्य ईरान के क़ानून मंत्री अमीन हुसैन रहीमी ने शुक्रवार को सेन पीटर्ज़बर्ग में अंतर्राष्ट्रीय लीगल जनरल असेंबली को संबोधित करते हुए स्वाधीन देशों के आपसी समन्वय पर ज़ोर दिया और कहा कि एकक्षपीय रूप से पाबंदिया लगाने वाले देशों का मुक़ाबला करना समय की ज़रूरत है और इस तरह की पाबंदियां लगाने वालों के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

बहुत समय से अमरीका के नेतृत्व में पश्चिमी देश पाबंदियों को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और इससे अपने राजनैतिक, आर्थिक और सुरक्षा लक्ष्य पूरे करते हैं। अमरीका तो अलग अलग राजनैतिक, व्यापारिक, सुरक्षा यहां तक कि मानवाधिकार से जुड़े विषयों के बहाने दूसरे देशों विशेष रूप से अपने प्रतिद्वंद्वियों के ख़िलाफ़ पाबंदियों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है। यह सारी बहानेबाज़ी तो सिर्फ़ दिखावा होता है, अस्ली वजह अमरीका के स्वार्थ होते हैं। अमरीका सारी दुनिया में सबसे अधिक पाबंदियां लगाने वाला देश है। अमरीका ने विदेश नीति के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बार बार पाबंदियां लगाई हैं। अमरीका के पश्चिमी घटक पाबंदियों के मसले में अमरीका का साथ देते हैं। यह पाबंदियां अमरीका और पश्चिम की नीतियों के विरोध की वजह से दूसरे देशों पर लगाई जाती हैं। इस्लामी गणराज्य ईरान पर 40 साल से अधिक समय से अमरीका ने एकतरफ़ा पाबंदियां लगा रखी हैं।

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने अपने शासनकाल में परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद ईरान पर बेहद कठोर पाबंदिया लगाईं इस उम्मीद पर कि ईरान को झुकाया जाए मगर अमरीका को नाकाम ही हाथ लगी। इस समय जो बाइडन की सरकार भी इसी रास्ते पर चल रही है। वह भी अपने नारों के विपरीत ईरान पर अधिकतम दबाव की नीति ही इस्तेमाल कर रही है और आए दिन ईरान के ख़िलाफ़ नई पाबंदियां लगा रही है।

वाशिंग्टन ने यह हद कर दी कि कोरोना वायरस की महामारी के दौर में भी जब दुनिया देशों के सामने गंभीर संकट था, ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदियों को जारी रखा। अमरीका ने ईरान, रूस, चीन, वेनेज़ोएला, क्यूबा, सीरिया और उत्तरी कोरिया सहित अनेक देशों पर एकपक्षीय पाबंदिया लगा रखी हैं। जबकि संयुक्त राष्ट्र संघ कई बार अमरीका की एकतरफ़ पाबंदियों की आलोचना कर चुका है। संयुक्त राष्ट्र ने कोविड 19 के दौर में यह मांग की थी कि अमरीका एकतरफ़ा पाबंदियां समाप्त करे ताकि ज़रूरत मंद देशों को देवाएं और मेडिकल एड पहुंचाई जा सके। संयुक्त राष्ट्र संघ की विशेष रिपोर्टर एलेने दोहेन ने कहा कि एकतरफ़ा पाबंदियों से संयुक्त राष्ट्र संघ कमज़ोर होता है, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के मैदान में डर पैदा होता है और क़ानून की संप्रभुता के रास्ते में समस्याएं पैदा होती हैं।

यह लगता है कि अमरीका और पश्चिम की एकतरफ़ा पाबंदियों के विनाशकारी प्रभावों के दृष्टिगत एक अंतर्राष्ट्रीय लीगल क्लब का गठन ज़रूरी है जो ग़ैर क़ानूनी पाबंदियों का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुक़ाबला करे।

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