13 मई 2023 - 14:29
अफ़ग़ानिस्तान पहुंचे क़तर के प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया की राजनीती में आएगा बड़ा बदलाव।

ग़ौर तलब है कि साल 2020 में जब अमेरिका ज़िल्लत और अपमान के साथ, अफगानिस्तान से निकला था, तो दोनों देशों के बीच बातचीत में कतर ने ही मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।

ईरान सऊदी अरब और यूएई के साथ साथ अब क़तर भी पश्चिमी एशिया की राजनीति में दिलचस्पी लेते हुए अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए कोशिशें कर रहा है। इसी क्रम में कल क़तर के विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री पड़ संभाल रहे मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान आले सानी अफ़ग़ानिस्तान एक हाई लेवल डेलिगेशन के साथ अफ़ग़ानिस्तान पहुंचे जहां उन्होंने तालिबान हाई कमान से मुलाक़ात की। 

ग़ौर तलब है कि साल 2020 में जब अमेरिका ज़िल्लत और अपमान के साथ, अफगानिस्तान से निकला था, तो दोनों देशों के बीच बातचीत में कतर ने ही मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।

इस सफर में क़तर के नेता तालिबान के प्रधानमंत्री से भी मुलाक़ात करेंगे। मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान आले सानी की अफ़ग़ान यात्रा से पहले ह तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने ट्वीट करते हुए कहा था कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात में आपसी रिश्तों को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को बढ़ाने पर चर्चा होगी। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक क्षेत्रों में भी क़तर और अफगानिस्तान के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

बताते चले कि साल 2013 में कतर ने ही पहली बार तालिबान को दोहा में अपना कार्यालय खोलने की इजाजत दी थी। पश्चिम एशिया में ईरान सऊदी अरब और स्नायुक्त अरब की तरह ही अपनी पैठ बनाने के लिए कोशिश कर रहे क़तर ने 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत भी कराई थी। 

कतर का सऊदी अरब और यूएई के साथ तनातनी का इतिहास रहा है, यही वजह है कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदल रहे हालात को देखते हुए कतर इन देशों से पीछे नहीं रहना चाहता।