आईआरजीसी के कमान्डर इनचीफ़ मेजर जनरल हुसैन सलामी ने कहा कि ज़ायोनी जो कुछ महीने पहले पागलपन में ग्रस्त थे, अब दंग रह गये हैं क्योंकि अवैध अधिकृत क्षेत्रों में प्रतिदिन 30 से अधिक शस्त्र कार्यवाहियां हो रही हैं।
हुसैन सलामी का कहना था कि पश्चिम यह समझ चुका है कि सिस्टम द्वारा युद्ध नहीं जीते जाते और यही कारण है कि पश्चिम सांस्कृतिक हमले द्वारा और आर्थिक नाकाबंदी, आतंकवाद, विध्वंसक कार्यवाहियों, असुरक्षा के माहौल को पैदा करके और प्राक्सी वार के दायरे को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है ताकि इस प्रकार ईरानी राष्ट्र पर दबाव डाला जा सके।
उन्होंने यह बात बल देकर कही कि कोई भी सेना इन साज़िशों में से किसी एक का भी मुक़ाबला नहीं कर सकती लेकिन इस्लामी गणेतंत्रर ईरान ने अब तक इन सारी साज़िशों का डटकर मुक़ाबला किया और अपने झंडे को ऊंचा रखा है।
आईआरजीसी के कमान्डर इनचीफ़ का यह भी कहना था कि ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध का अनुभव हमेशा सकारात्मक और मीठा रहा है और वह सारे लोग जो ईरानी राष्ट्र का बुरा चाहने वाले ह।, साम्राज्यवादी देशों से लेकर रुढ़ीवादी अरब देशों और यहां तक कि विदेशी विरोधी तक कि जो इस उम्मीद में थे कि पिछले साल के हंगामों और दंगों से वह अपने योजनाओं और लक्ष्यों को हासिल करने में सफल हो जाएंगे लेकिन इस बार भी न केवल उन्हें विफलता का मुंह देखना पड़ा बल्कि आज वह ख़ुद की टूट फूट का शिकार हैं और ईरान की इस्लामी व्यवस्था निरंतर पूरी ताक़त के साथ खड़ी है। (AK)
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