16 अप्रैल 2023 - 20:17
अगर बुद्धिमत्ता से अमल किया जाये तो दुश्मन की योजनाओं को नाकाम बनाया जा सकता हैः सर्वोच्च नेता

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने आज रविवार को ईरान की सशस्त्र सेना के कमांडरों और जिम्मेदारों से मुलाकात की जिसमें उन्होंने सशस्त्र सेना को हज़रत अली अलैहिस्सलाम के कथनानुसार देश व राष्ट्र की मज़बूत दीवार बताया और बल देकर कहा कि यह बहुत बड़ा स्थान, भारी ज़िम्मेदारी लाता है और ईश्वर की कृपा से सशस्त्र सेना इस गौरवांवित स्थान को समझ कर अपने दायित्वों का निर्वाह कर रही है।

उन्होंने सशस्त्र सेना की प्रगति पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि मज़बूत से मज़बूत होने पर भी कभी संतुष्ट व आश्वस्त न हों और विराम के बिना आगे बढ़ते रहें। इसी प्रकार इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने पवित्र कुरआन की आयत का हवाला देते हुए कहा कि हमेशा तैयार रहना महान ईश्वर का आदेश और ईश्वर तथा राष्ट्र के दुश्मनों के भय का कारण है।

उन्होंने कहा कि खतरा पूरी तरह कभी भी खत्म नहीं होगा इस आधार पर जितना तैयारी कर सकते हैं करें। उन्होंने सशस्त्र सेना की तैयारी को दुश्मनों के लिए रोधक शक्ति करार दिया और षडयंत्रकारियों के मुकाबले में होशियार रहने को पूरी तरह ज़रूरी बताया। इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने विश्व के विभिन्न क्षेत्रों व भागों में अंतरराष्ट्रीय युद्धोन्मादी शक्तियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि साम्राज्य जहां भी अपना हित देखता है वहां विवाद व युद्ध करवा देता है।

अमेरिका ने लगभग दो दशक पहले एक जंग ईरान के पूर्व में और दूसरी जंग ईरान के पश्चिम में जो आरंभ करवाई उसकी ओर इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने इशारा किया और कहा अमेरिकियों के इराक और अफगानिस्तान में हित थे परंतु उनका अंतिम लक्ष्य इस्लामी ईरान था कि इस्लामी क्रांति के आधारों के बहुत मजबूत होने के कारण उन्हें अपने लक्ष्यों में नाकामी का सामना करना पड़ा।

उन्होंने जायोनी शासन की वर्तमान स्थिति को इस प्रकार की विफलता के एक अन्य नमूने के रूप में पेश किया और कहा कि पिछले साल रमज़ान महीने में फिलिस्तीनियों के खिलाफ जायोनी शासन की कार्यवाहियों पर दुनिया में कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं दिखाई गयी परंतु इस वर्ष अमेरिका और ब्रिटेन में भी उसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी प्रकार इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने दुश्मन से ग़ाफिल व निश्चिंत न होने को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि कभी भी दुश्मन की मक्कारी, धूर्तता और साज़िशों से बेखबर नहीं होना चाहिये। MM

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