20 साल से तुर्की की सत्ता पर क़ाबिज़ रजब तय्यब अर्दोग़ान की इस बार सत्ता में वापसी की राहें बेहद कठिन हो गयी हैं। अर्दोग़ान और कुर्सी के बीच में सबसे बड़ी रुकावट बने हुए हैं तुर्की के गाँधी कहलाने वाले कमाल कलीचदार ओग़लू। अर्दोग़ान के खिलाफ छह विपक्षी दलों ने कमाल कलीचदार ओग़लू को अपना साझा उम्मीदवार बनाया है।
कमाल 'तुर्की के गांधी' कहे जाते हैं। वह देश के लोगों के हक, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र की लड़ाई लड़ते रहे हैं। तुर्क मीडिया भी उन्हें कमाल गांधी कहता है।
ओपिनियन पोल के नतीजो पर यक़ीन करें तो अर्दोग़ान अपने प्रतिद्वंदी से पूरे दस प्रतिशत पीछे चल रहे हैं। पोल सर्वे के अनुसार,अर्दोग़ान की AK और उसकी सहयोगी एमएचपी को संसदीय चुनावों में 45 प्रतिशत वोट मिलने की उम्मीद है। वहीं, रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के लीडर और विपक्ष के साझा उम्मीदवार कमाल इससे दस प्रतिशत अंको के साथ भारी बढ़त बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अर्दोग़ान की खराब आर्थिक नीतियों के चलते तुर्की की हालत काफी बदहाल है। महंगाई तेजी से बढ़ रही है। सामान की कीमतें आसमान छु रही हैं जबकि करेंसी हर दिन के साथ नीचे गिर रही है। तुर्की की करेंसी लीरा लगातार कमजोर हो रही है। महंगाई दर 57% के करीब है।
कॉस्ट ऑफ लिविंग के बढ़ने से जनता परेशान है। आलम ये है कि घर का किराया भी बेहिसाब बढ़ गया है पहले जिस घर के लिए 4,500 लीरा (करीब 19,700 रुपए) देने होते थे उसके लिए अब तकरीबन 30,000 लीरा (करीब 131,000 रुपए) देने पड़ रहे हैं।
तुर्की के एक आम नागरिक के बक़ौल, 'हम अचानक गरीब हो गए हैं। स्ट्रीट पर महंगाई 600% महसूस हो रही है, लेकिन पेंशन में बढ़ोतरी केवल 30% है।' इस्तांबुल के एक रेस्तरां मैनेजर ने कहा, 'अब केवल बहुत अमीर या बहुत गरीब हैं। कोई मिडिल क्लास नहीं है। सरकारी सहायता के बाद भी महंगाई का सामना करना मुश्किल है। यहां भविष्य अंधकार में है।'
ऐसे में अर्दोग़ान के मुक़ाबले में कमाल कलीचदार की चुनौती बेहद मज़बूत हो जाती है, कमाल के लिए उनकी पार्टी से ही पिछले चुनाव में उम्मीदवार रहे मुहर्रम इन्स मुश्किल बन सकते हैं जो अब पार्टी से अलग होकर पांच छोटे छोटे दल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके मैदान में उतरने का नुकसान "तुर्की के गांधी" को होगा। उन्हें ऐसे हजारों वोट मिल सकते हैं जो कमाल को जाते।
वहीँ तुर्की में बदलते माहौल को देखते हुए अमेरिकी राजदूत ने भी कमाल से जाकर मुलाक़ात की जिस से नाराज़ अर्दोग़ान ने अमेरिकी राजदूत की आलोचना करते हुए उनसे मुलाक़ात से इंकार कर दिया है। अर्दोग़ान ने अमेरिकी दूत की आलोचना करते हुए कहा है कि उन्हें इतना तो शऊर होना चाहिए कि वह किस से मुलाक़ात कर रहे हैं। उन्हें राष्ट्रपति से मुलाक़ात करना चाहिए। कमाल से मुलाक़ात करने के बाद वह किस मुंह से राष्ट्रपति अर्दोग़ान से मुलाक़ात की अपील कर रहे हैं ? तुम्हारे लिए राष्ट्रपति से मुलाक़ात के सभी रास्ते बंद हैं।
अर्दोग़ान ने अमेरिकी दूत को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें अपनी हदों का पता होना चाहिए और उन हदों से आगे नहीं बढ़ना चाहिए। एक राजदूत की जो ज़िम्मेदारियाँ हैं अपनी हदों में रहते हुए उन्ही को निभाएं उन से आगे न बढ़ें।
बता दें कि आने वाली 14 मई को होने वाले चुनाव में अर्दोग़ान को कमाल कलीचदार से कड़ी चुनौती मिल रही है।