कट्टर चरमपंथी ज़ायोनी कैबिनेट मंत्री इतमार बिन गवीर ने नेतन्याहू के अदालती सिस्टम में बदलाव की योजना से वक़्ती तौर पर क़दम पीछे खींचने के बारे में बात करते हुए कहा है कि इस योजना से पीछे हटने के बदले में हमारी सरकार ने नेशनल गॉर्ड नाम से एक अलग फौजी यूनिट बनाने की योजना बनाई है।
इतमार बिन गवीर के इस खुलासे से इस्राईल में लगी आग और भड़क गयी है। ज़ायोनी सेना और प्रदर्शनकारियों ने इतमार के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और प्रदर्शनकारियों का घुस और भड़क गया है। उन्होंने इस फाॅर्स पर इतमार बिन गवीर और उनके आँतरिक सुरक्षा मंत्रालय की निगरानी का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि वह इसे अपनी पर्सनल मिलिशिया फाॅर्स की तरह डील करेंगे जो न सेना के नियंत्रण में होगी न ही पुलिस विभाग के।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेशनल गार्ड में हज़ारो ट्रेंड सैनिकों को भर्ती किया जाएगा जो खतरों और संकट के समय रैपिड एक्शन फाॅर्स की तरह काम करेंगे फिर चाहे यह खतरा किसी भी तरफ से हो। हिंसक और शांति भंग करने वाले प्रदर्शन बता कर इस फ़ोर्स को विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को कुचलने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
कुछ लोग बिन गवीर और नेतन्याहू की इस योजना को इस्राईल के हालिया संकट से जोड़ कर ही देख रहे हैं ऐसा गंभीर और खतरनाक संकट जो अमेरिका के सीधे दखल के बाद भी खत्म नहीं हो रहा है बल्कि अमेरिका और इस्राईल के सत्ताधारियों में ज़बानी जंग का कारण भी बन रहा है।
इस्राईल की सत्ता पर क़ाबिज़ दक्षिण पंथी नस्लवादी कटटर ज़ायोनी सरकार इस आसानी से कुर्सी नहीं छोड़ेगी। इसी लिए इतमार बिन गवीर अपनी स्पेशल फ़ोर्स बनाने पर ज़ोर दे रहे हैं कि अगर इस्राईल में कोई विद्रोह होता है, कोई गृहयुद्ध होता है या नेतन्याहू को रास्ते से हटा दिया जाता है तो उनके पास अपना एक विशेष बल हो।
इस्राईल उस दो राहे पर पहुँच गया है जहाँ दक्षिणपंथी नस्लवादी सरकार कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं ऐसे में विद्रोह की बात साफ़ सुनी और महसूस की जा सकती है। इस्राईल के सबसे घृणित और नफरती राजनेताओं में सबसे आगे रहने वाले इतमार बिन गवीर और स्मोतरिच से गठबंधन करते हुए नेतन्याहू खुद को उस जाल में डाल चुके हैं जिस से निकलने के लिए वह जितने हाथ पैर मारेंगे उतने ही फंसते जाएंगे। वह सत्ता पाने के लिए बोतल में बंद शैतान को आज़ाद कर चुके हैं।
इस्राईल हो रहे ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन के चलते वह अदालती सिस्टम में बदलाव की अपनी योजना को चाह कर भी आगे नहीं बढ़ा सकते
जबकि हत्या के डर और सत्ता से हटते ही बाक़ी उम्र जेल में सड़ने के डर से पीछे भी नहीं हट सकते।
जबकि इस्राईल में होने वाला कोई विद्रोह भी इस ज़ायोनी देश को संकट के इस भंवर से नहीं निकाल सकता। नेतन्याहू ने सत्ता पाने के लिए जिस बोतल बंद शैतान को आज़ाद किया है वह शैतान कहीं बाहर से नहीं आया बल्कि फिलिस्तीन में बनी अवैध कालोनी में रहने वाले ज़ायोनी लोगों ने उसे चुन कर नेतन्याहू की मदद से सत्ता के शिखर तक पहुँचाया है।
ऐसे में इस्राईल के सामने सिर्फ एक ही रास्ता बचता है और वह है गृहयुद्ध का, विनाशकारी गृहयुध्द , जिसका अवैध ज़ायोनी राष्ट्र को सामना करना ही होगा।