उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान आईएईए के साथ सहयोग करना जारी रखेगा। विदेश मंत्री ने वार्ता में क़तर की सकारात्मक भूमिका की प्रशंसा की और कहा कि दोहा ने ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच कैदियों के आदान-प्रदान और परमाणु समझौते में भी सकारात्मक भूमिका निभाई है।
गौरतलब है कि परमाणु समझौते की बहाली को लेकर वियाना में चल रही बातचीत इस मुकाम पर पहुंच चुकी है कि अगर अमेरिका कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसला लेता है तो एक विश्वसनीय और स्थिर समझौता संभव है। यह याद रखना चाहिए कि वाशिंगटन के दावों के बावजूद, संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2018 में जेसीपीओए से अपनी वापसी की एकतरफा घोषणा की और ईरान पर प्रतिबंध लगाए। अब भी, ज़ायोनी लॉबी के दबाव और बाइडेन प्रशासन के सामने आन्तरिक चुनौतियों के सामने, वाशिंगटन परमाणु समझौते पर न लौटने का बहाना बना रहा है और निराधार आरोप लगाकर ईरान को वर्तमान स्थिति के लिए दोषी ठहरा रहा है। तेहरान की तार्किक स्थिति यह है कि परमाणु समझौते से हटने की स्थिति में अमेरिका को इस समझौते के सभी प्रावधानों के कार्यान्वयन की गारंटी देनी होगी और आईएईए को अतिरिक्त सवालों से भी बचना होगा।