पिछले तीन महीने से भी अधिक समय से भारी संकट का सामना कर रहे इस्राईल के हालात संभलने का नाम नहीं ले रहे हैं। तल अवीव में जहाँ लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का काम काज तक ठप सा हो गया वहीँ देश के कोने कोने में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे है।
हालात इतने खतरनाक हैं की ज़ायोनी प्रधानमंत्री ने सेना में बढ़ रहे असंतोष और ना फ़रमानी को देखते हुए सेना में सर्विस करने और सेवा देने से मना करने वाले सैनिकों और रिज़र्व बलों को कड़ी कार्रवाई की धमकी देने के साथ ही अब प्रधानमंत्री कार्यालय और आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के बीच बातचीत के बाद ज़ायोनी शासन के आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के तहत एक नए सैन्य बल के गठन की योजना बनाई गई है।
इस्राईली मीडिया ने खबर देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और इंटरनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतमार बिन गवीर ने इंटरनल सिक्योरिटी मिनिस्ट्री के तहत नेशनल गार्ड के गठन पर सहमति बनाई है और इसे कैबिनेट की अगली बैठक में मंज़ूरी दे दी जाएगी। वहीँ प्रदर्शनकारियों ने इस योजना पर कड़ा विरोध जताते हुए आज रात काप्लान रोड पर जमा होने की कॉल देते हुए कहा है कि नेतन्याहू ने इतमार बिन गवीर को अपने हथियारबंद लड़ाके दिए हैं जो प्रदर्शनकारियों पर हमले कर सकते हैं।
इस्राईल की सेना में असंतोष और ड्यूटी छोड़ कर भागने का चलन बढ़ रहा है। हज़ारों सैनिकों ने फ़ौज में सेवा देने से मना कर दिया है। सैनिक और आर्मी डॉक्टर्स समेत एयरफोर्स के पायलट प्रदर्शनकारियों के साथ हैं।
गठबंधन नेताओं के साथ बैठक ले रहे नेतन्याहू ने इस्राईल में फैले संकट पर बात करते हुए कहा कि मुट्ठीभर चरमपंथी हैं जो सरकार गिराना चाहते हैं और इसके लिए किसी भी हद तक जा रहे हैं इस्राईल सेना के बिना अपना वुजूद नहीं बचा सकता और हमे अपनी फ़ौज में न फ़रमानी और अराजकता नहीं चाहिए।
देश में भड़ते विरोध प्रदर्शन के बीच राजधानी तल अवीव के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का काम काज भी ठप से पड़ा हुआ है अब जा नेतन्याहू ने अपने फैसले से क़दम पीछे हटाने की बात कही है तो तल अवीव से जाने वाली उड़ानों का रास्ता साफ़ होने के आसार हैं।
नेतन्याहू के इस फैसले से पीछे हटने की खबर के बाद भी आज 1 लाख से ज़्यादा ज़ायोनियों ने संसद के सामने प्रदर्शन करते हुए अदालती सिस्टम में बदलाव के इस क़ानून के खलाफ नारेबाजी की वहीँ प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी तादाद सभी सुरक्षा घेरों को तोड़ते हुए पार्लियामेंट में घुस गई जहाँ उनका सुरक्षा कर्मियों से टकराव हुआ।
नेतन्याहू ने बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए ज़ाहिरन क़दम पीछे खींचने के ऐलान करते हुए कहा कि हम अदालती सिस्टम में बदलाव की अपनी योजना को कुछ वक़्त के लिए रोक रहे हैं, लेकिन लगता नहीं कि वह अपने विरोधियों के आगे घुटने तक देंगे फिर चाहे उसके लिए कोई भी क़ीमत चुकानी पड़ी और यह बात उनके उस बयान से एक दम साफ़ हो गई जिसमे उन्होंने कहा कि मुट्ठीभर चरमपंथी हैं जो सरकार गिराना चाहते हैं लेकिन हम साफ़ कर देना चाहते हैं कि पार्लियामेंट से लेकर सड़क तक, बहुमत हमारे साथ हैं और हम किसी को भी बहुमत और चुनाव नतीजों को हाईजैक करने की इजाज़त नहीं देंगे।
सेना में बढ़ते असंतोष और जवानों के सेना से अलग होने से चिंतित ज़ायोनी नेता की ओर से जहाँ नेशनल गार्ड के गठन की बात सामने आ रही वहीं उन्होंने ऐसे सैनिकों और ऑफिसर्स को दण्डित करने की धमकी के साथ ही कहा कि एक छोटा सा गुट है जो देश में हिंसा की आग भड़काने के लिए तैयार है और सेना में जवानों को सेवा करने भी नहीं दे रहा। वह जवानों को सेना से दूर कर रहे हैं जबकि सब जानते हैं कि फ़ौज के बिना इस्राईल का वुजूद नहीं रह सकता।
नेतन्याहू ने कहा कि हम एक खतरनाक संकट में घिरे हैं। यह संकट अपने चरम पर है। मैंने बार बार बातचीत के लिए कहा है। हम किसी दुश्मन के सामने नहीं खड़े, बल्कि भाई भाई के खिलाफ खड़ा है और भाईयों के बीच यह हिंसा और जंग सही नहीं है।
नेतन्याहू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इस्राईल के पूर्व विदेश मंत्री लिबरमैन ने कहा कि उनके भाषण से साफ़ साफ़ ज़ाहिर होता है कि वह किसी भी ज़माने की तुलना में इस बार अपने फैसलों को पूरा करने के लिए तैयार हैं और वह अपने फैसले को अंतिम रूप देने के लिए कोई भी हथकंडा अपनाने को तैयार हैं। हम जानते हैं और सच यही है कि वह कोई बातचीत नहीं करना चाहते, उनकी नियत में खोट है और वह भरोसे के लायक नहीं।
वहीं बैनी गांट्ज़ ने कहा कि यह फैसला देर से ही सही लेकिन लिया तो गया और यह कोई फैसला न होने से बेहतर है।
नेतन्याहू ने अटपटे मन से ही सही लेकिन इस योजना से पीछे हटने के संकेत तो दिए हैं लेकिन इस से इस्राईल का संकट खत्म नहीं हो जाता। जहाँ आज भी विरोध प्रदर्शन की कॉल दी गई हैं वहीँ खुद ज़ायोनी कैबिनेट में इस फैसले के बाद विवाद और गहरा गया है। ज़ायोनी कैबिनेट इस बारे में एक मत नहीं नहीं। जहाँ ज़ायोनी वित्त मंत्री स्मोत्रिच ने अदालती सिस्टम में सुधार के इन क़ानूनों पर रोक लगाने का समर्थन किया है वहीं चरमपंथी आंतरिक सुरक्षा मंत्री इतमार बिन गवीर ने इस का सख्ती से विरोध करते हुए गठबंधन टूटने और सरकार गिरने की धमकी दी है।
संसदीय सूत्रों ने खबर देते हुए कहा है कि नेतन्याहू के सहयोगियों ने कहा है कि वह क़ानून मंत्री यारिव लेविन को पद छोड़ने के लिए मजबूर करें और उनसे इस्तीफ़ा ले वहीँ यारिव लेविन ने ऐसी किसी भी संभावना का सख्ती से खंडन करते हुए कुर्सी छोड़ने से इंकार कर दिया है।
ग़ौर तलब है कि इस से पहले ज़ायोनी युद्ध मंत्री की सलाह से नाराज़ नेतन्याहू ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था जिसने इस्राईल के संकट की आग में घी का काम किया।
नेतन्याहू की पार्टी के ही सीनियर मेंबर और सेना के जनरल रह चुके योआव गैलेंट ने नए विवादित कानूनों का विरोध किया था और सरकार से इन्हें रोकने की अपील की थी जिस से नाराज़ प्रधानमंत्री ने ज़ायोनी युद्ध मंत्री को ही कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
इस्राईल पूरी तरह तब जाम हो गया जब यहाँ की सबसे बड़ी यूनियन ने दुनिया भर में इस्राईल के राजनयिक मिशनों सहित सभी सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने को कहा था. इस्राईल में लगी आग विदेशों में उसके दूतावास और वाणिज्य दूतावास तक पहुँच गई। इसी क्रम में भारत में इस्राईल के दूतावास के अधिकारी हड़ताल पर चले गए. भारत में इस्राईल के दूतावास ने सोमवार शाम बयान जारी करते हुए कहा था कि भारत और दुनिया भर में सभी इजराइली मिशनों के अधिकारी तब तक हड़ताल पर रहेंगे, जब तक यह क़ानून रोक नहीं दिया जाता. जबकि न्यूयॉर्क में तो इस्राईल के महावाणिज्यदूत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
इस्राईल में संकट बढ़ा तो राष्ट्रपति इस्हाक़ हर्ज़ोग से लेकर अमेरिका तक ने नेतन्याहू को समझाने के लिए ज़मीन आसमान एक कर दिया और ज़ाहिरन नेतन्याहू ने क़दम पीछे खींचते हुए अदालती सिस्टम में बदलाव की प्रक्रिया को वक़्ती तौर पर रोक दिया
लेकिन ख़तरा अभी टला नहीं, अब तस्वीर का रुख बदला तो असल टकराव का ख़तरा भी गहरा गया। चरमपंथी ज़ायोनी धड़ा इस क़ानून को लागू करने के लिए सड़कों पर उतरने का ऐलान कर चूका है जिस में खुद नेतन्याहू के कैबिनेट मंत्री इतमार बिन गवीर भी शामिल है।
नेतन्याहू के समर्थक चरमंथी ज़ायोनी धड़े ने इस क़ानून को लागू कराने के लिए स्ट्रीट कैंपिंग शुरू करने ऐलान किया है।
चरमपंथी ज़ायोनी और गठबंधन सरकार में शामिल दलों के समर्थकों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलने और इस क़ानून को लागू कराने के लिए स्ट्रीट कैंपिंग शुरू करने का ऐलान किया है। अल मयादीन की रिपोर्ट के मुताबिक़, ज़ायोनी कैबिनेट के आंतरिक सुरक्षाः मंत्री इतमार बिन गवीर ने भी ऐलान किया है कि वह इस मुहिम में हिस्सा लेंगे और सड़कों पर उतरेंगे। जिस पर सरकार विरोधी प्रदर्शन की कॉल देने वाले संगठनों ने कहा है कि नेतन्याहू ने इतमार बिन गवीर को अपने हथियारबंद लड़ाके दिए हैं जो प्रदर्शनकारियों पर हमले कर सकते हैं।
वहीँ इतमार बिन गवीर ने चरमपंथी समूहों और गठबंधन दलों के सहयोगियों को भारी तादाद में इस स्ट्रीट कैंप में हिस्सा लेने की दावत देते हुए कहा कि बस बहुत हुआ, आज हम खामोश नहीं रहेंगे। हम आज अपनी चुप्पी तोड़ेंगे। इसी बीच ज़ायोनी रब्बियों ने भी नेतन्याहू से कहा है कि वह विरोधियों की फ़िक्र न करें और इन क़ानूनों को लागू करें।
इस्राईल में असल टकराव तो अब शुरू होगा , आने वाली कुछ रातें इस्राईल के लिए बेहद डरावनी होने वाली हैं। संघर्ष, हिट एंड रन का ख़तरा बढ़ा गया है। पुलिस ने भी आज रात गंभीर टकराव और संघर्ष को लेकर चेतावनी दी है। और यह डर नेतन्याहू को भी सता रहा है। उन्होंने सरकार समर्थकों और विरोध कर रहे लोगों से अपील करते हुए ट्वीट किया, हिंसा और संघर्ष से बचें, हम भाई भाई हैं, एक दूसरे के दुश्मन न बनें।
मक़बूज़ा फिलिस्तीन में व्यापक हड़ताल, अब नेतन्याहू के अपने फैसले से पीछे हटने, चरमपंथी तथा सरकार समर्थकों के मैदान में उतर कर विरोध कर रहे लोगों के मुक़ाबिल मोर्चा संभालने के बाद हालात पहले से ज़्यादा विस्फोटक हो गए। इतना की पुलिस जहाँ रातों को होने वाली हिंसा से डरी हुई है वहीं महीनों से अपनी हठ पर डटे रहने वाले नेतन्याहू भी भाईचारे की दुहाई देते हुए शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।